एटा: जनपद में मौसम के लगातार बदलते मिजाज का सीधा असर लोगों की सेहत पर देखने को मिल रहा है। ठंड, नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण हृदयाघात (heart attacks) और सांस संबंधी बीमारियों (diseases) के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। रविवार को ऐसे ही दो अलग-अलग मामलों में दो वृद्धजनों की मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई, जबकि सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे सात अन्य मरीजों को भर्ती कराया गया है, जिनका इलाज जारी है।
पहला मामला थाना मिरहची क्षेत्र के गांव धिरामई निवासी बाबूराम (80) का है। परिजनों के अनुसार रविवार दोपहर करीब दो बजे बाबूराम घर पर बैठे हुए थे, तभी अचानक उनके सीने में तेज दर्द और घबराहट शुरू हो गई। हालत बिगड़ने पर स्वजन उन्हें आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि बाबूराम को पूर्व में कोई गंभीर बीमारी नहीं थी और यह घटना अचानक हुई, जिससे परिवार सदमे में है।
दूसरा मामला शहर के मोहल्ला भगीपुर निवासी शिवदयाल (60) का है। रविवार सुबह करीब छह बजे उन्हें अचानक सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत होने लगी। स्वजन तुरंत उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन करीब दस मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि शिवदयाल को पहले से सांस की समस्या थी, जो मौसम ठंडा होने के साथ और अधिक गंभीर हो गई।
इसी दिन सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर सात अन्य मरीजों को भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इनमें शांति देवी (45) निवासी नगला गड़रिया अमापुर कासगंज, राकेश कुमार (60) निवासी भगीपुर, सुषमा देवी (55) निवासी श्याम नगर, सीमा देवी (28) निवासी सिढपुरा कासगंज, होरीलाल (85) निवासी चोंचा बनगांव, रामवती (55) निवासी मिरहची और ज्ञान सिंह (60) निवासी जखाबा कुरावली मैनपुरी शामिल हैं। सभी मरीजों का इलाज चिकित्सकीय निगरानी में चल रहा है।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि ठंड और मौसम में बदलाव के कारण शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है, जिससे हृदयाघात का खतरा बढ़ जाता है। वहीं ठंडी हवा और नमी के कारण अस्थमा, सीओपीडी और अन्य सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की परेशानी भी बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक घबराहट, कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय सहायता लें।


