सैफई महोत्सव की यादें हुईं ताजा, अखिलेश यादव बोले,‘स्वर अब स्मृति बन गए’
इटावा
भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके जाने से संगीत प्रेमियों के बीच गहरा दुख व्याप्त है। इटावा जनपद के सैफई क्षेत्र में भी उनके चाहने वाले बेहद भावुक नजर आए, जहां उनके सुरों की गूंज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। खासकर वर्ष 2004 के सैफई महोत्सव की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, जब उन्होंने अपने गीतों से वहां मौजूद हजारों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
सैफई की धरती पर दिसंबर 2004 की वह ठिठुरती रात आज भी लोगों के जेहन में बसी हुई है। Saifai Mahotsav के मंच पर जब आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा था, तो कड़ाके की ठंड भी उनके सुरों के आगे फीकी पड़ गई थी। देर रात तक चला उनका कार्यक्रम दर्शकों के उत्साह और तालियों की गूंज से सराबोर रहा। हजारों की भीड़ उनके हर गीत पर झूम उठी थी और पूरा पंडाल संगीत के रंग में रंग गया था।
उनके निधन की खबर के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “आशा जी का स्वर अब स्मृति बन गया है, लेकिन उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगी।” उन्होंने सैफई महोत्सव में उनकी प्रस्तुति को याद करते हुए कहा कि वह पल आज भी अविस्मरणीय हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आशा भोसले केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक युग थीं, जिनकी आवाज ने कई पीढ़ियों को जोड़ा। उनके गीतों ने प्रेम, विरह, खुशी और हर भावना को बखूबी व्यक्त किया। सैफई में आयोजित उनके कार्यक्रम ने इस क्षेत्र को भी एक अलग पहचान दिलाई थी।
संगीत जगत में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनके हजारों गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से जो खालीपन आया है, उसे भर पाना संभव नहीं है।
फिलहाल पूरे देश के साथ-साथ सैफई क्षेत्र में भी शोक का माहौल है और लोग अपनी प्रिय गायिका को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे है


