मध्य पूर्व में हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। अमेरिका का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) तीन गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर के साथ मिडल ईस्ट पहुंच चुका है। इस सैन्य तैनाती को सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका की बढ़ती आक्रामकता के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से ईरान पर हमला करने की अमेरिकी क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि इस एयरक्राफ्ट स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र में “स्थिरता और सुरक्षा” बढ़ाने के लिए तैनात किया गया है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। अमेरिका लगातार ईरान पर हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या और दमन का आरोप लगा रहा है और साफ चेतावनी दे चुका है कि अगर तेहरान ने यही रवैया जारी रखा, तो सैन्य दखल से भी पीछे नहीं हटेगा।
वॉशिंगटन की इस धमकी के बाद ईरान भी खुलकर मैदान में उतर आया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के शासन ने अमेरिका को सीधी चुनौती देते हुए उसे कमजोर करार दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बयान देकर अमेरिकी ताकत की हवा निकालने की कोशिश की है।
ईरानी समाचार एजेंसी Mehr के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के बूते की बात नहीं है कि वह ईरान पर सरप्राइज अटैक करे या कोई निर्णायक हमला कर सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अमेरिका किसी “गलत और कमजोर आकलन” के आधार पर सीमित कार्रवाई जैसी किसी भी सैन्य कोशिश में गया, तो हालात पूरी तरह हाथ से निकल जाएंगे।
इस बयान ने साफ कर दिया है कि ईरान अब पीछे हटने के मूड में नहीं है। बल्कि वह अमेरिका को यह संदेश देना चाहता है कि किसी भी हमले की कीमत बहुत भारी होगी। ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान इसे सिर्फ धमकी नहीं, बल्कि खुले युद्ध के संकेत के तौर पर देख रहा है।
तनाव के इस माहौल में हिजबुल्लाह भी खुलकर ईरान के समर्थन में कूद पड़ा है। हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने ऐलान किया है कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो हिजबुल्लाह ईरान के साथ खड़ा होगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। इस बयान ने पूरे लेबनान और क्षेत्र में खलबली मचा दी है।
हालांकि हिजबुल्लाह के इस रुख पर खुद लेबनान के भीतर तीखा विरोध शुरू हो गया है। लेबनान के सांसद और काताएब पार्टी के नेता सैमी गेमायेल ने हिजबुल्लाह पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश को एक और युद्ध में झोंकने की कोई जरूरत नहीं है।
सैमी गेमायेल ने बेहद सख्त शब्दों में हिजबुल्लाह को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आपको सुसाइड करनी है तो करिए, लेकिन लेबनान को दांव पर मत लगाइए।” उन्होंने कहा कि अगर हिजबुल्लाह अपने “बॉस” यानी ईरान को बचाने के लिए मरना चाहता है, तो वह उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन पूरे देश को इस आग में झोंकना अपराध होगा।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सूत्रों का दावा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान की सरकार अंदर से कमजोर हो रही है। यही वजह है कि वॉशिंगटन अब दबाव और ताकत दोनों का इस्तेमाल कर रहा है।


