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Saturday, April 4, 2026

युद्ध का असर: शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों में डर, कारोबार में आई बड़ी कमी

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अमेरिका, ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मार्च महीने में निफ्टी और सेंसेक्स में 11 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और उनके निवेश व्यवहार पर पड़ा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा जारी मासिक बुलेटिन के अनुसार, युद्ध से पहले जनवरी और फरवरी में शहर के निवेशक शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में प्रतिमाह करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे थे। हालांकि मार्च में यह घटकर लगभग 3600 करोड़ रुपये रह गया, जो निवेशकों की घटती भागीदारी और बाजार में बढ़ते डर को दर्शाता है।

यदि दैनिक कारोबार के आधार पर देखा जाए तो जनवरी-फरवरी में जहां औसत ट्रेडिंग 250 करोड़ रुपये प्रतिदिन से अधिक थी, वहीं मार्च में यह घटकर करीब 190 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार की स्थिति स्पष्ट होने तक इंतजार कर रहे हैं।

कानपुर, जो कभी यूपी स्टॉक एक्सचेंज की विरासत को संभाले हुए था, आज भी निवेश के मामले में देश के प्रमुख शहरों में शामिल है। म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में यह उत्तर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है और देश के टॉप 15 शहरों में अपनी जगह बनाए हुए है। दिलचस्प बात यह है कि यहां का म्यूचुअल फंड निवेश पूरे उत्तराखंड राज्य से भी अधिक है और देश के कुल निवेश में इसकी हिस्सेदारी लगभग 0.47 प्रतिशत है।

नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार में भी कमी आई है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में उत्तर प्रदेश में 4.20 लाख नए निवेशक जुड़े थे, जबकि मार्च में यह संख्या घटकर 3.87 लाख रह गई। यानी नए निवेशकों की वृद्धि दर में लगभग 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि बाजार की अनिश्चितता का असर नए निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह के अनुसार, इस समय “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाना बेहतर है। साथ ही मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश और एसआईपी के जरिए नियमित निवेश जारी रखना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, जिससे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनी रहती है।

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