– नोडल अधिकारी पर मिलीभगत का आरोप, क्लर्कों के इशारे पर जिलाधिकारी की छवि धूमिल करने की साजिश का दावा
फर्रुखाबाद: जिले में वित्तविहीन कॉलेजों (college) के शिक्षकों के वोट (vote) न बनाए जाने और उसके बाद अनंतरिम (ड्राफ्ट) सूची जारी कर दिए जाने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूरे प्रदेश में जहाँ वित्तविहीन शिक्षकों के वोट बन चुके हैं, वहीं फर्रुखाबाद में इन शिक्षकों को सूची से बाहर रखे जाने से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर गंभीर सवाल उठे हैं।
बोर्ड वेबसाइट पर सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड उपलब्ध, फिर भी वोट “नहीं बनाए गए”शिक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर जनपद के सभी वित्तविहीन कॉलेज शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है।
इन्हीं शिक्षकों से बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मूल्यांकन सहित विभिन्न कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन वोट बनाते समय नोडल अधिकारी ए पी सिंह द्वारा यह कह दिया गया कि—“ये शिक्षक हैं ही नहीं।”शिक्षकों ने इस बयान को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे बड़ा षड्यंत्र बताया है।
वित्तविहीन कॉलेज शिक्षकों ने बताया कि 2021 के एमएलसी चुनाव में भारी तादाद में शिक्षकों के वोट बने थे।लेकिन इस बार DIOS कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने मिलकर वोट निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित किया।
आरोप है कि डीआईओएस कार्यालय में तैनात ए पी सिंह क्लास-2 अधिकारी, जो जनपद के ही निवासी हैं और जिन्हें जिले में चार्ज देना नियम के विरुद्ध है,उन्हें ही वोट निर्माण का नोडल अधिकारी बना दिया गया।जो कथित रूप से, क्लर्क राजेश अग्निहोत्री और राजीव यादव के इशारे पर काम कर रहे है।
सूत्रों के अनुसारराजेश अग्निहोत्री, जिनकी तैनाती जीआईसी फर्रुखाबाद में है,लेकिन वे प्रतिदिन डीआईओएस कार्यालय में बैठते हैं।
राजीव यादव, लंबे समय से कार्यालय में सक्रिय प्रभाव रखते हैं। वरिष्ठ लिपिक संजीव सक्सेना पर आरोप है कि वे फर्जी सी एल लेकर इटावा शुक्रवार जाते और मंगलवार को लौट आते हैं, बाद मे ली हुईं सी एल को बापस ले लेते हैँ इटावा मे उनका घर है।
शिक्षकों का दावा है कि इन कर्मचारियों ने मिलकर वोट सूची में वित्तविहीन शिक्षकों के नाम मतदाता सूची मे न जुड़ने पाए इसके लिए डी आई ओ एस को गुमराह किया गया, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ।“जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की छवि खराब करने के लिए यह साजिश रची जा रही है।”उनका कहना है किरिकॉर्ड वेबसाइट पर मौजूद है,शिक्षक परीक्षा ड्यूटी में शामिल हैं,पूरा प्रदेश वोट बना चुका है, फिर सिर्फ फर्रुखाबाद में वोट गायब क्यों हैं?
पूरे मामले के सामने आने के बाद जिले में शिक्षकों में तीखा आक्रोश है।शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह चुनाव प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप है और तत्काल उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। किसी को भी अपनी बात रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे वित्त विहीन अध्यापकों मे भारी आक्रोश है। जिला चुनाव कार्यालय ने अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।


