वोलोदिमिर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को अमेरिकी दूतों से मुलाकात करेगा। यह बैठक रूस के साथ प्रस्तावित एक और त्रिपक्षीय वार्ता से पहले आयोजित की जा रही है। जेलेंस्की ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह कूटनीतिक प्रयास युद्ध के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जरेड कुशनर से मुलाकात करेंगे। उमेरोव की प्रेस सचिव डायना दावित्यान ने बताया कि यह बैठक स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में होगी। इसी दिन जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर भी वार्ता प्रस्तावित है।
अमेरिका की शांति पहल के तहत इस वर्ष रूस और यूक्रेन के बीच अबू धाबी और जिनेवा में वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
जेलेंस्की ने कहा कि गुरुवार की बैठक में युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण की संभावित योजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही मॉस्को के अधिकारियों के साथ होने वाली आगामी त्रिपक्षीय वार्ता की तैयारी पर भी विचार-विमर्श होगा। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने रुस्तम उमेरोव को संभावित कैदी अदला-बदली के मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनका देश चाहता है कि रूस के साथ अगली वार्ता अगले सप्ताह आयोजित हो। उनका कहना है कि यूक्रेन वास्तविक और टिकाऊ शांति समझौते के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग भी आवश्यक है।
इससे पहले एक कार्यक्रम में जेलेंस्की ने कहा था कि रूस अपनी बड़ी सेना और नागरिक इलाकों पर भारी बमबारी के बावजूद यूक्रेन को पराजित नहीं कर पाया है और न ही यूक्रेनी जनता के मनोबल को तोड़ सका है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन की रक्षा क्षमता पहले से अधिक मजबूत हुई है।
वाशिंगटन स्थित युद्ध अध्ययन संस्थान के अनुसार, पूर्वी मोर्चे पर लगभग 1,250 किलोमीटर लंबी फ्रंट लाइन के कुछ हिस्सों में हाल के महीनों में यूक्रेनी बलों ने रूसी सेना को पीछे धकेला है। इसे वर्ष 2024 के बाद की सबसे उल्लेखनीय बढ़त बताया जा रहा है, हालांकि सैनिकों की कमी के कारण बड़े पैमाने पर आक्रमण की संभावना सीमित है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूक्रेन रूस की वसंत और ग्रीष्मकालीन आक्रामक योजनाओं को बाधित करने में सफल रहता है, तो वार्ता की मेज पर उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। इस बीच यूक्रेन रूस के भीतर सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढांचे पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले जारी रखे हुए है।
कुल मिलाकर, जिनेवा में होने वाली यह बैठक आने वाले दिनों में रूस-यूक्रेन संघर्ष की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन कूटनीतिक प्रयासों से लंबे समय से जारी इस युद्ध के समाधान की कोई ठोस राह निकल पाएगी।


