घर घर में देवोत्थान एकादशी, भगवान विष्णु की पूजा, तोड़ गये गन्नों के आग

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फर्रुखाबाद। अगर में देवस्थान का पर्व धूम-धाम से साथ मनाया गया गागर में भगवान विष्णु की पूजा की गन्नों के आग तोड़े गए शकरकंद और सिंघाड़ो का भोग लगाया गया।
बता दें कि भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद इस दिन जागते हैं, जिसे देवोत्थान एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता का पूजन किया जाता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक राजा था जो भगवान विष्णु की पूजा करता था। एक दिन एक व्यक्ति राजा के पास आया और कहा कि वह भगवान विष्णु के साथ भोजन करेगा। राजा ने उस व्यक्ति से कहा कि आज एकादशी है और वह केवल फलाहार करेगा।राजा ने उस व्यक्ति से कहा कि वह भी एकादशी का व्रत रखे, लेकिन उसने मना कर दिया। तब राजा ने एक शर्त रखी कि वह एकादशी के दिन अन्न नहीं खाएगा, लेकिन उस व्यक्ति को अपने साथ भोजन करने के लिए कहा।उस व्यक्ति ने भोजन बनाया और भगवान विष्णु को बुलाया। भगवान विष्णु उसके पास आए और उसके साथ भोजन किया। भोजन के बाद भगवान विष्णु अंतर्धान हो गए और उस व्यक्ति को भोजन करने के बाद राजा के पास जाने के लिए कहा।इस कथा का उद्देश्य यह है कि देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है
लोगों ने प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया तुलसी माता के सामने गन्ने के दो डंठल खड़े किये।गन्ने पर हल्दी, रोली और चावल किये,दीपक जलाएऔर विष्णु मंत्र या “ॐ नमो नारायणाय” का जप किया। निर्धन तुलसी माता की पूजा का भी विशेष महत्व है।

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