


लखनऊ/अयोध्या। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार को उत्तर भारतीय राजनीति में हिंदुत्व की सबसे मुखर और बेबाक आवाज़ों में गिना जाता है। राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर आज के राजनीतिक विमर्श तक, विनय कटियार का नाम उस विचारधारा से जुड़ा रहा है जिसने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को बदला।
कटियार उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने हिंदुत्व को केवल नारा नहीं, बल्कि संगठन, आंदोलन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित किया।
1990 के दशक में जब अयोध्या केंद्र में थी और राम जन्मभूमि आंदोलन अपने निर्णायक दौर में पहुंच रहा था, उस समय विनय कटियार आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में रहे। उनके भाषणों में हिंदू अस्मिता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की स्पष्ट झलक मिलती थी।
कटियार का मानना रहा है कि हिंदुत्व भारत की आत्मा है, और जब तक राजनीति इस आत्मा से नहीं जुड़ेगी, तब तक सामाजिक एकता संभव नहीं है। यही कारण रहा कि वे हमेशा स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखते रहे, चाहे उसकी राजनीतिक कीमत कुछ भी क्यों न चुकानी पड़ी हो।
वर्ष 1984 में बजरंग दल की स्थापना कर विनय कटियार ने हिंदुत्व को युवा शक्ति से जोड़ने का कार्य किया। बजरंग दल ने न केवल राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, बल्कि हिंदू समाज को संगठित करने में भी निर्णायक योगदान दिया।
कटियार का दृष्टिकोण था कि जब तक युवा पीढ़ी सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से सजग नहीं होगी, तब तक राष्ट्रवादी राजनीति मजबूत नहीं हो सकती। इसी सोच ने उन्हें हिंदुत्व की जमीनी राजनीति का प्रमुख चेहरा बना दिया।
विनय कटियार की राजनीति का सबसे बड़ा आधार रहा— विचारधारा से कोई समझौता नहीं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कहा कि सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन हिंदुत्व स्थायी विचार है।
उनके कई बयान विवादों में भी रहे, लेकिन समर्थकों का कहना है कि कटियार ने कभी भी राजनीतिक सुविधा के अनुसार अपने शब्द नहीं बदले। यही कारण है कि उन्हें “फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता” के रूप में पहचाना जाता है।
राम मंदिर निर्माण के बाद यह सवाल उठता रहा कि क्या राम आंदोलन के पुराने चेहरे अब अप्रासंगिक हो जाएंगे। लेकिन विनय कटियार की वैचारिक मौजूदगी यह दर्शाती है कि हिंदुत्व केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली विचार प्रक्रिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में भाजपा और हिंदुत्व आधारित राजनीति को अनुभवी और वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध नेताओं की आवश्यकता होगी—और इस दृष्टि से विनय कटियार आज भी प्रासंगिक हैं।
हिंदुत्व और राजनीति का भविष्य
71 वर्ष की उम्र में भी विनय कटियार का वैचारिक प्रभाव यह बताता है कि हिंदुत्व की राजनीति व्यक्ति नहीं, विचार से चलती है। वे आज भी उन नेताओं में हैं जिनका नाम आते ही समर्थकों में उत्साह और विरोधियों में असहजता दोनों दिखाई देती है।


