20.1 C
Lucknow
Wednesday, February 25, 2026

विक्रम मिसरी का वैश्विक मंच से आह्वान: हथियारों की नई होड़ पर लगे रोक, सामूहिक सुरक्षा पर हो जोर

Must read

भारत ने दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और हथियारों की नई दौड़ पर गंभीर चिंता जताते हुए वैश्विक समुदाय से संयम और सहयोग की अपील की है। जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य अत्यंत अनिश्चित होता जा रहा है। सैन्य खर्च में लगातार वृद्धि और पुराने हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने से रणनीतिक संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है।

विदेश सचिव ने विशेष रूप से न्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने को वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है और विश्व शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

भारत की परमाणु नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ के सिद्धांत पर कायम है। भारत ‘नो-फर्स्ट यूज’ नीति का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि वह पहले परमाणु हथियार का उपयोग नहीं करेगा। साथ ही, भारत उन देशों के खिलाफ परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेगा जिनके पास ऐसे हथियार नहीं हैं।

विक्रम मिसरी ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए चरणबद्ध, पारदर्शी और भेदभाव रहित प्रक्रिया की वकालत की। उन्होंने कहा कि ऐसी वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है जिसे सभी देश स्वीकार करें और जिसकी प्रभावी निगरानी संभव हो। उन्होंने ‘फिसाइल मटीरियल कट-ऑफ ट्रीटी’ पर सार्थक और शीघ्र वार्ता का समर्थन भी दोहराया।

तकनीकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों पर भी भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। विदेश सचिव ने कहा कि नई और उभरती प्रौद्योगिकियां सैन्य क्षमताओं को तो बढ़ा रही हैं, लेकिन इनके साथ नए जोखिम भी जुड़ रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि इन तकनीकों के वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव का गहन अध्ययन किया जाए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सैन्य उपयोग को लेकर भारत ने जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। मिसरी ने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवीय कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। किसी भी सैन्य प्रणाली में अंतिम निर्णय और निगरानी मानव के हाथ में रहना अनिवार्य है।

उन्होंने बताया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के उपयोग के लिए एक घरेलू ढांचा विकसित किया है, जो सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे सिद्धांतों पर आधारित है। परमाणु हथियारों से जुड़े सभी निर्णय पूरी तरह मानवीय नियंत्रण में ही रहेंगे, इस पर भी उन्होंने जोर दिया।

विदेश सचिव ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें 100 से अधिक देशों ने भाग लिया था। इस मंच पर एआई तकनीक को समावेशी और वैश्विक विकास के साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया, विशेषकर ग्लोबल साउथ देशों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

अंतरिक्ष सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आउटर स्पेस सहयोग और साझा विकास का क्षेत्र होना चाहिए, न कि टकराव का। भारत अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नियमों का समर्थन करता है। साथ ही, भारत दिसंबर 2025 में बायोलॉजिकल वेपन्स कन्वेंशन की 50वीं वर्षगांठ पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी भी करेगा।

अपने संबोधन के अंत में विक्रम मिसरी ने सभी देशों से आह्वान किया कि वे संकीर्ण राष्ट्रीय हितों से ऊपर उठकर सामूहिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी विश्वास ही सबसे बड़ा आधार बन सकते हैं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article