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Tuesday, January 27, 2026

विजय–रश्मिका की ‘राणा बाली’: ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की आग, रायलसीमा के जख्मों से निकली एक ऐतिहासिक गाथा

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विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की आने वाली फिल्म ‘Rana Bali’ इतिहास, विद्रोह और दमन की कहानी को बड़े पर्दे पर उतारने जा रही है। राहुल सांकृत्यान के निर्देशन में बनी यह पीरियड ड्रामा ब्रिटिश राज के उस दौर को दिखाती है, जब अत्याचार के खिलाफ उठी चिंगारी पूरे इलाके को जला देने की ताकत रखती थी। फिल्म को रायलसीमा (आंध्र प्रदेश) के इतिहास से प्रेरित बताया जा रहा है—एक ऐसा क्षेत्र जिसे लंबे समय तक “शापित भूमि” कहा गया।

19वीं सदी की पृष्ठभूमि, अंग्रेजों के खिलाफ बगावत

‘राणा बाली’ की कहानी 1854 से 1878 के बीच के समय की है। यह वह दौर था जब विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद रायलसीमा अकाल, गरीबी, किसानों के शोषण और जमींदारों–माफियाओं की मनमानी से जूझ रहा था। ब्रिटिश शासन ने विकास और सिंचाई के वादे किए, लेकिन ज़मीनी हकीकत बदतर होती चली गई—और यहीं से जन्म लेता है विद्रोह।

कौन निभा रहा है कौन सा किरदार

विजय देवरकोंडा: मुख्य नायक ‘राणा बाली’ के रूप में—एक ऐसा योद्धा जो दमन के आगे झुकने से इनकार करता है।

रश्मिका मंदाना: जयम्मा के किरदार में—कहानी की भावनात्मक रीढ़।

हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड वोस्लू: खलनायक सर थियोडोर हेक्टर, ब्रिटिश सत्ता के क्रूर चेहरे के रूप में।

टीज़र ने बढ़ाया तापमान

फिल्म का पहला टीज़र सामने आ चुका है, जिसमें विजय देवरकोंडा को घोड़े पर सवार होकर एक ब्रिटिश अफसर को घसीटते हुए दिखाया गया है। टीज़र में “शापित भूमि” का जिक्र, खून-खराबा और विद्रोह की गूंज साफ महसूस होती है—यानी यह सिर्फ कहानी नहीं, एक ऐलान है।

रायलसीमा: संघर्षों की धरती

कडपा, कुरनूल जैसे जिलों में दशकों तक भूमि विवाद, पारिवारिक दुश्मनी, राजनीतिक हिंसा और संसाधनों के शोषण ने हजारों जानें लीं। पानी की कमी, खनिजों की लूट और गुटबाजी ने इस क्षेत्र को लगातार पीछे धकेला। हालांकि 2000 के बाद हिंसा में कमी आई, लेकिन इतिहास के ये जख्म आज भी यादों में ताजा हैं—और ‘राणा बाली’ इन्हीं जख्मों की कहानी कहने का दावा करती है।

पैन-इंडिया रिलीज

एक्शन, इमोशन और ऐतिहासिक घटनाओं के जबरदस्त मिश्रण के साथ ‘राणा बाली’ एक पैन-इंडिया फिल्म होगी, जो 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

कुल मिलाकर, ‘राणा बाली’ सिर्फ एक पीरियड ड्रामा नहीं, बल्कि उस गुस्से, पीड़ा और विद्रोह की दास्तान है जिसे इतिहास के पन्नों में अक्सर दबा दिया गया। अब देखना यह है कि क्या यह फिल्म रायलसीमा की कहानी को देशभर के दर्शकों तक उतनी ही तीव्रता से पहुंचा पाती है, जितना इसका टीज़र वादा करता है।

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