जनपद।
विधानसभा अध्यक्ष के हालिया जनपद आगमन के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अनदेखी को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रोटोकॉल और प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष के स्वागत के दौरान मंचीय व्यवस्था और औपचारिक कार्यक्रम में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया। जबकि किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के दौरे पर सुरक्षा, समन्वय और व्यवस्था की मुख्य जिम्मेदारी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की होती है।
प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, ऐसे आयोजनों में जिला प्रशासन की मौजूदगी न केवल औपचारिक होती है, बल्कि पूरे कार्यक्रम की सफलता और सुरक्षा उसी पर निर्भर करती है। इसके बावजूद यदि वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह स्थापित प्रशासनिक परंपराओं के विपरीत माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि स्वागत कार्यक्रमों में कभी-कभी स्थानीय राजनीति और मंच प्रबंधन की होड़ में प्रशासनिक अधिकारियों को हाशिये पर डाल दिया जाता है, जो भविष्य में राजनीति और प्रशासन के बीच समन्वय को कमजोर कर सकता है।
इस मामले को लेकर प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि ऐसी घटनाएं यदि सामान्य होती गईं, तो इससे न केवल अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा, बल्कि संस्थागत सम्मान को भी नुकसान पहुंचेगा।
फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही आयोजन से जुड़े जिम्मेदारों की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। लेकिन इतना तय है कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद के आगमन पर जिला प्रशासन की अनदेखी को उचित नहीं माना जा सकता।

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