वेनेजुएलाl विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने सोमवार को देश की राजनीति को झकझोर देने वाला गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने के कुछ ही घंटों बाद उनके सबसे करीबी सहयोगियों में से एक जुआन पाब्लो गुआनिपा का अपहरण कर लिया गया। मचाडो के इस बयान के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
मचाडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जुआन पाब्लो गुआनिपा को राजधानी काराकास के एक आवासीय इलाके से आधी रात के आसपास अगवा किया गया। उन्होंने दावा किया कि भारी हथियारों से लैस लोग, जो सादे कपड़ों में थे, चार वाहनों में आए और जबरन गुआनिपा को अपने साथ ले गए। मचाडो ने इसे खुली दमनात्मक कार्रवाई बताते हुए उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब वेनेजुएला सरकार ने रविवार को नजरबंद और जेल में बंद विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को रिहा किया था। इन रिहाइयों को सरकार की ओर से तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन गुआनिपा के कथित अपहरण ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जुआन पाब्लो गुआनिपा वेनेजुएला के एक वरिष्ठ विपक्षी नेता और पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं। वह मारिया कोरिना मचाडो के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में गिने जाते हैं। उन्होंने आठ महीने से अधिक समय जेल में बिताया था और हाल ही में उनकी रिहाई हुई थी, जिसे विपक्ष ने एक बड़ी जीत के रूप में देखा था।
गुआनिपा ने जेल से रिहा होने के कुछ घंटों बाद ही पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वेनेजुएला अब बदल चुका है। उन्होंने कहा था कि अब सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। उनके इस बयान के कुछ ही समय बाद अपहरण की खबर ने विपक्षी समर्थकों को स्तब्ध कर दिया।
विपक्षी नेताओं की रिहाई उस समय हुई जब कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ रहा था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रतिनिधियों की वेनेजुएला यात्रा के बाद सरकार ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिससे उम्मीद जगी थी कि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
सोमवार सुबह इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए सरकार के प्रेस कार्यालय से संपर्क किया गया, लेकिन तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। सरकार की चुप्पी ने संदेह और आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह अपहरण सत्ता के विरोधियों को डराने की रणनीति का हिस्सा है।
गौरतलब है कि 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद सरकार ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का सिलसिला शुरू किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव का नतीजा माना गया।
रविवार को जेलों के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों की रिहाई का इंतजार करते नजर आए। इस दौरान “हम नहीं डरते, हम नहीं डरते” के नारे गूंजे और लोगों ने प्रतीकात्मक मार्च भी किया। यह दृश्य जनता के भीतर बदलाव की उम्मीद और सत्ता के प्रति गुस्से दोनों को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुआनिपा का कथित अपहरण वेनेजुएला में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका है। यदि इस मामले पर सरकार ने स्पष्टता नहीं दिखाई, तो देश में राजनीतिक टकराव और अंतरराष्ट्रीय दबाव दोनों और तेज हो सकते हैं।


