– हरियाणा के आईजी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या पर दलित–बहुजन समाज में गहरा आक्रोश; मायावती ने सरकार से समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की अपील की
नई दिल्ली/हरियाणा: हरियाणा में आईजी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वाई. पूरन कुमार द्वारा की गई आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना दलित और बहुजन समाज के लोगों के लिए गहरा आघात है और प्रशासनिक पदों पर रहते हुए भी जातिवादी उत्पीड़न के जघन्य प्रभाव को उजागर करती है।
सूत्रों के अनुसार, आईजी पूरन कुमार ने लगातार जातिवादी शोषण और प्रताड़ना का सामना करते हुए यह कदम उठाया। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि शासन-प्रशासन के उच्च स्तर में भी जातिवाद की जड़ें गहरी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सरकार की नीति और नीयत से जुड़ा गंभीर सवाल है।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने हरियाणा सरकार से अपील की कि वह मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से ले और किसी प्रकार की लीपापोती या खानापूर्ति न करे। मायावती ने कहा कि जांच में किसी भी तरह की देरी या अधूरी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है और केन्द्र सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट को भी इस मामले का उचित संज्ञान लेना चाहिए।
मायावती ने विशेष रूप से यह भी कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को केवल “क्रीमी लेयर” की दृष्टि से जोड़ने वाले लोग इस घटना से सबक लें। उन्होंने कहा कि धन और पद मिलने के बावजूद जातिवादी उत्पीड़न और शोषण का पीछा नहीं छोड़ता और यह हर स्तर पर जारी रहता है।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से समयबद्ध, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं को रोका जा सके। इस घटना ने एक बार फिर पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए अभी भी लंबा संघर्ष बाकी है।





