– गोरखपुर में टोरेंट पावर का पायलट प्रोजेक्ट, रामपुर में जीरो फुटप्रिंट इंडस्ट्रीज की पहल से कार्बन उत्सर्जन में आएगी बड़ी कमी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश तेजी से ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को गति दी जा रही है। इन पहलों के माध्यम से न केवल ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदेश के गोरखपुर में टोरेंट पावर द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस परियोजना के तहत 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है, जो लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने में सक्षम है। यह परियोजना भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के बड़े पैमाने पर उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।
इसी क्रम में रामपुर में जीरो फुटप्रिंट इंडस्ट्रीज द्वारा भी ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से कार्बन उत्सर्जन में लगभग 500 टन तक की कमी आने की संभावना है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर सकती हैं। राज्य सरकार भी निवेश को आकर्षित करने और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए लगातार नीतिगत कदम उठा रही है।


