लखनऊ। प्रदेश में उत्तर से दक्षिण दिशा को जोड़ने के लिए छह नए नार्थ-साउथ कारीडोर के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना स्वीकृत हो चुकी है और जल्द ही कैबिनेट से एस्टीमेट पास कराकर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जिस पर उनकी सहमति मिल गई है। यह पहली बार है जब प्रदेश में उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी के लिए इतने बड़े स्तर पर योजना बनाई गई है। अब तक बने अधिकांश एक्सप्रेसवे और हाईवे पूर्व-पश्चिम दिशा में रहे हैं।
इन कारीडोरों के बन जाने से दो दर्जन से अधिक जिलों में आवागमन आसान होगा। साथ ही औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री पिछले दो वर्षों से उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के प्रयास कर रहे थे और इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मांग रखी गई थी।
पहला कारीडोर श्रावस्ती के इकौना से अयोध्या, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक 262 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें कुछ खंड पहले से चार लेन हैं, जबकि शेष को सिक्स लेन और फोर लेन में विकसित किया जाएगा। यह कारीडोर पूर्वांचल और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
दूसरा कारीडोर कुशीनगर से देवरिया, गाजीपुर होते हुए वाराणसी तक 220 किलोमीटर का होगा, जिसमें कई हिस्से पहले से चार लेन हैं।
तीसरा कारीडोर भारत-नेपाल सीमा से सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक 295 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है, जो कई प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा।
चौथा कारीडोर लखीमपुर से सीतापुर, लखनऊ और बांदा तक 502 किलोमीटर का होगा।
पांचवां कारीडोर बरेली से आगरा, झांसी होते हुए ललितपुर तक 547 किलोमीटर लंबा बनेगा।
छठवां कारीडोर पीलीभीत से शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, उरई होते हुए हरपालपुर तक 514 किलोमीटर का प्रस्तावित है।
प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग अजय चौहान के अनुसार, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआइ/मोर्थ द्वारा बनाए जाने वाले हिस्सों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद काम शुरू होगा और लक्ष्य है कि सभी छह कारीडोर दो वर्षों में बनकर तैयार हो जाएं।

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