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Wednesday, March 18, 2026

यूटा का मशाल जुलूस, टीईटी अनिवार्यता के विरोध में सैकड़ों शिक्षक सड़कों पर उतरे

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फर्रुखाबाद

शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किए जाने की मांग को लेकर यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के बैनर तले बुधवार को जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बीएसए कार्यालय फ पर धरना देने के बाद मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व यूटा जिलाध्यक्ष पीयूष कटियार एवं जिला महामंत्री पंकज यादव ने किया, जिसमें लगभग पांच सैकड़ा शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए। जिलाध्यक्ष पीयूष कटियार ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 29 जुलाई 2011 को लागू हुआ था और उस समय यह प्रावधान था कि अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाएगी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा संशोधित अधिनियम संख्या 24 ऑफ 2017 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के निर्णय ने सभी शिक्षकों के लिए दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे देशभर के लाखों वरिष्ठ शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट उत्पन्न हो गया है।
जिला महामंत्री पंकज यादव और संयुक्त मंत्री संजीव गुप्ता ने कहा कि यह समय शिक्षक एकजुटता दिखाने का है और यूटा संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राठौर के नेतृत्व में संगठन केंद्र सरकार के सांसदों और मंत्रियों से संपर्क कर कानून में संशोधन की मांग कर रहा है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से कानूनी लड़ाई भी जारी है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल वर्मा और उपाध्यक्ष विनोद गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री को सभी जिलों से ज्ञापन भेजकर शिक्षकों के साथ न्याय की मांग उठाई जा रही है। धरना-प्रदर्शन के बाद शाम को शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक मशाल जुलूस निकाला और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का समापन किया।
प्रदर्शन में फूल सिंह, मनोज शर्मा, नितिन गंगवार, अनुपम सक्सेना, संजय कुमार, अरुण कुमार, विश्राम सिंह, आकाश विश्नोई, कपिल गुप्ता, अंजू कटियार, नीलम राठौर, अर्चना सिंह, सीमा पथरिया, राममोहन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।

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