– भूमिगत ठिकाने को बनाया निशाना; आसमान में धुएं और आग का गुबार
वाशिंगटन
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के इस्फहान शहर पर बड़े हमले की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस हमले में भारी क्षमता वाले बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने करीब 2000 किलोग्राम वजनी बंकर-बस्टर बम से इस्फहान के एक भूमिगत ढांचे को निशाना बनाया। यह हमला कथित तौर पर एक हथियार डिपो पर केंद्रित था।
हमले के बाद इस्फहान के आसमान में आग और घने धुएं का विशाल गुबार उठता देखा गया। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें जोरदार धमाके के बाद भयावह दृश्य दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे इस कार्रवाई की गंभीरता और बढ़ गई है।
हालांकि, इस हमले को लेकर अभी तक आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे बड़ी सैन्य कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जिस स्थान को निशाना बनाया गया, वह एक अत्यंत सुरक्षित भूमिगत ढांचा था। ऐसे ठिकानों को नष्ट करने के लिए विशेष रूप से बंकर-बस्टर बमों का उपयोग किया जाता है।
इस्फहान शहर ईरान की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां कई संवेदनशील प्रतिष्ठान और सैन्य ढांचे मौजूद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस्फहान के आसपास ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकाने भी स्थित हैं, जिससे इस हमले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
दावा किया जा रहा है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम भी इसी क्षेत्र के भूमिगत ठिकानों में संग्रहित किया जाता रहा है, जो इसे और अधिक अहम बनाता है।
अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए गए बंकर-बस्टर बम अपनी विशेष क्षमता के लिए जाने जाते हैं। ये बम मजबूत कंक्रीट और जमीन के अंदर बने ठिकानों को भेदने में सक्षम होते हैं।
इन बमों को आमतौर पर अत्याधुनिक बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर विमान के जरिए गिराया जाता है। यह विमान दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को चकमा देने में सक्षम माना जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के हमले का उद्देश्य दुश्मन के रणनीतिक और गुप्त ठिकानों को निष्क्रिय करना होता है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता कमजोर पड़े।
इस घटना के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच तनाव चरम पर बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है, ताकि स्थिति और न बिगड़े।


