तेहरान
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कथित बातचीत को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बातचीत के दावे के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान के शीर्ष नेताओं ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की औपचारिक बातचीत नहीं हुई है और यह दावा भ्रामक है।
ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका और इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मौजूदा संकट से निकलने के लिए झूठी खबरें फैला रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की “फेक न्यूज” का मकसद अंतरराष्ट्रीय तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करना है, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा कर रणनीतिक फायदा उठाया जा सके।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ईस्माईल बघई ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तेहरान का रुख पहले जैसा ही कायम है और अमेरिका के साथ किसी प्रकार की औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि कुछ मित्र देशों के माध्यम से अमेरिका की ओर से बातचीत के संकेत मिले थे, लेकिन ईरान ने उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
ईरान ने अपनी स्थिति और स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह उन देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहता है जिन्हें वह हमलावर मानता है। गालिबाफ ने दो टूक कहा कि जब तक ईरान अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता, तब तक वह अपने सुप्रीम लीडर और जनता के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
वहीं, स्ट्रैट ऑफ़ होरमुज़ को लेकर भी ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे पर किसी भी प्रकार का हमला हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, एक ओर अमेरिका की तरफ से बातचीत के दावे किए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान लगातार इनकार कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है और हालात फिलहाल बेहद नाजुक बने हुए हैं।


