ऊर्जा विभाग में बड़ा सुधार: अब 30 दिन में पूरी होगी जांच, विभागीय कार्रवाई होगी तेज और पारदर्शी

0
21

लखनऊ| ऊर्जा विभाग ने बिजली निगम के अभियंताओं एवं कर्मचारियों के खिलाफ की जाने वाली विभागीय कार्रवाई को समयबद्ध और सरल बनाने के लिए नियमों में बड़े पैमाने पर संशोधन कर दिए हैं। पॉवर कॉर्पोरेशन निदेशक मंडल की ओर से मंजूर किए गए इन बदलावों के बाद लम्बे समय से लंबित पड़े विभागीय प्रकरणों के निस्तारण में अब तेजी आने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत किसी भी मामले की जांच अधिकतम 30 दिनों में पूरी करनी होगी, जिससे विभागीय कार्रवाई न केवल तेजी से पूरी होगी बल्कि इसमें पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। अब अध्यक्ष, निगम के प्रबंध निदेशक और नियुक्ति अधिकारी जांच समिति गठित करने के बजाय सीधे जांच अधिकारी से जांच करवा सकेंगे, इससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी रुक जाएगी। हालांकि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जरूरत पड़ने पर अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक जांच समिति गठित करने का अधिकार रखते रहेंगे। ऊर्जा विभाग ने तर्क दिया है कि जांच प्रक्रिया आसान होने से मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और दोषी कर्मचारियों पर समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी, वहीं निर्दोष कर्मचारियों को अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी।

नए नियमों के तहत जांच अधिकारी की नियुक्ति पदानुसार तय की गई है। टीजी-2 और अन्य कर्मियों के मामलों में, जहां नियुक्ति अधिकारी अधिशासी अभियंता हों, वहां जांच अधिकारी कम से कम अधिशासी अभियंता या उससे उच्च स्तर का अधिकारी होगा। इसी तरह सहायक अभियंता और अवर अभियंता स्तर के मामलों में जांच अधिकारी कम से कम अधीक्षण अभियंता या उससे ऊपर के स्तर का होगा, जबकि अधिशासी अभियंता और उससे ऊपर के पदों से जुड़े मामलों में जांच अधिकारी मुख्य अभियंता या उससे उच्च पद का अधिकारी नामित किया जाएगा। जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए समय-सीमा भी सख्ती से तय कर दी गई है। आरोपपत्र तैयार करने के लिए 0 से 30 दिन तक का समय निर्धारित किया गया है। आरोपी को अपना उत्तर देने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा, जो विशेष परिस्थितियों में 30 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। उत्तर प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर सुनवाई शुरू करनी होगी और इसे अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। सुनवाई पूरी होने के बाद जांच आख्या 15 दिन के भीतर प्रस्तुत करनी होगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय और निस्तारण जांच आख्या प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर करना होगा। ऊर्जा विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से अनुशासनात्मक कार्यवाही अधिक पारदर्शी, त्वरित और परिणाममूलक होगी तथा विभागीय कार्यप्रणाली में दक्षता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here