लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चालू सत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को वितरित किए जा रहे पुष्टाहार की गुणवत्ता और लागत को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सदन में समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई दर को देखते हुए 66 रुपये की लागत में 600 कैलोरी का संतुलित और गुणवत्तापूर्ण पुष्टाहार उपलब्ध कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि यदि इतनी कम राशि में पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है तो उसकी गुणवत्ता और पौष्टिकता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बच्चों को दिए जा रहे खाद्यान्न की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे कुपोषण की समस्या दूर करने के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि पुष्टाहार की आपूर्ति किन मानकों के तहत हो रही है और उसकी नियमित मॉनिटरिंग कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
इस पर महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, उन्होंने विधायक द्वारा उठाए गए प्रश्न का विस्तृत और तथ्यों सहित लिखित उत्तर देने का आश्वासन दिया।
मंत्री ने कहा कि यदि कहीं भी गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सदन में उठे इस मुद्दे के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के लिखित जवाब और संभावित सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि यह विषय सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

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