लखनऊ। साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक प्रभावशाली लघु फिल्म तैयार की है, जिसमें फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने अनोखे अंदाज में एक साइबर ठग को ही ठग लिया। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह नाना पाटेकर साइबर अपराधी के जाल को समझते हुए उससे 60 हजार रुपये निकलवा लेते हैं। यह लघु फिल्म कानपुर में सामने आई एक वास्तविक “डिजिटल अरेस्ट” से जुड़ी घटना पर आधारित है।
फिल्म के अनुसार, साइबर अपराधी नाना पाटेकर को फोन कर खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग समेत गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज होने की बात कहता है और 15 लाख रुपये की मांग करता है। बातचीत के दौरान नाना पाटेकर को ठगी का अंदेशा हो जाता है। वह खुद को गरीब बताते हुए कहते हैं कि उनके पास इतनी बड़ी रकम नहीं है और पत्नी के गहने गिरवी पड़े हैं। गहने छुड़ाने के लिए ज्वेलर 35 हजार रुपये मांग रहा है।
15 लाख रुपये के लालच में साइबर अपराधी खुद नाना पाटेकर के खाते में 35 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर देता है। इसके बाद नाना पाटेकर और 25 हजार रुपये की मांग करते हैं, जिसे अपराधी भेज भी देता है। इसी दौरान जब सच्चाई सामने आती है तो ठग को एहसास होता है कि जिसे वह शिकार समझ रहा था, उसी ने उसे ठग लिया है।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि यह लघु फिल्म हाल ही में कानपुर में सामने आई उस वास्तविक घटना से प्रेरित है, जिसमें एक जागरूक नागरिक ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर हो रही साइबर ठगी को सूझबूझ से नाकाम कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह फिल्म लोगों को साइबर अपराध, फर्जी पुलिस कॉल, मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर ठगी और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे नए हथकंडों से सतर्क करने में मदद करेगी।
उत्तर प्रदेश पुलिस इस लघु फिल्म को इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म और सिनेमा हॉलों में दिखाने की तैयारी कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर ठगी के तरीकों को समझ सकें और खुद को सुरक्षित रख सकें।





