लखनऊl उत्तर प्रदेश पुलिस में बीते साल के अंत तक हुए रिटायरमेंट और प्रमोशन के बाद अफसरों की रैंक संरचना में बड़ा असंतुलन सामने आया है। स्थिति यह है कि एडीजी और डीआईजी रैंक के अफसरों की संख्या पदों के मुकाबले कहीं ज्यादा हो गई है, जबकि आईजी रैंक के अफसरों की भारी कमी हो गई है। आने वाले वर्षों, खासकर 2027 के प्रमोशन के बाद यह असंतुलन और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदेश में एडीजी रैंक के कुल 21 कैडर पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में 36 एडीजी रैंक के अफसर तैनात हैं। इनमें से चार अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा एडीजी की कुछ कैडर पोस्ट पर डीजी स्तर के अफसरों की तैनाती की गई है। यूपी-112 एडीजी की कैडर पोस्ट है, लेकिन वहां डीजी नीरा रावत तैनात हैं। इसी तरह एडीजी कार्मिक की पोस्ट पर आईजी स्तर के अफसर की तैनाती है, जबकि यह एडीजी की कैडर पोस्ट मानी जाती है। एडीजी पद्मजा चौहान के पास डीजी फायर का प्रभार है, वहीं एडीजी कानून एवं व्यवस्था और आईजी एसटीएफ जैसे अहम पदों पर एडीजी अमिताभ यश तैनात हैं। टेलीकॉम विभाग की एडीजी कैडर पोस्ट पर भी डीजी स्तर के अफसर की तैनाती की गई है।
आईजी रैंक की स्थिति और भी चिंताजनक है। प्रदेश में आईजी कैडर के कुल 51 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 33 आईजी रैंक के अफसर ही उपलब्ध हैं। इनमें हाल ही में 2008 बैच के प्रमोट होकर आईजी बने अफसर भी शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश की 18 रेंज में आईजी स्तर की अधिकांश कैडर पोस्ट पर डीआईजी रैंक के अफसरों को तैनात किया गया है, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
डीआईजी स्तर पर स्थिति उलट है। 2012 बैच के अफसरों के प्रमोशन के बाद प्रदेश में डीआईजी रैंक के अफसरों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जबकि स्वीकृत पद सिर्फ 51 हैं। माना जा रहा है कि इस अतिरिक्त संख्या को देखते हुए बड़े जिलों में एसएसपी स्तर पर डीआईजी रैंक के अफसरों को तैनाती दी जा सकती है। साथ ही आईजी कैडर की बड़ी रेंजों में भी डीआईजी रैंक के अफसरों को जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना है।कुल मिलाकर यूपी पुलिस में रैंक और पदों के बीच यह असंतुलन आने वाले समय में पोस्टिंग और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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