लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों की तैयारी के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची जारी कर दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के बाद जारी की गई इस सूची में बड़े स्तर पर संशोधन किया गया है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि पंचायत चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जा सकें।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान 1 करोड़ 81 लाख नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए, जबकि 1 करोड़ 41 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हटाए गए नामों में मृतक मतदाता, स्थानांतरित हो चुके लोग और डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान 53 लाख 67 हजार 410 डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान की गई, जिनके नाम सूची से हटाए गए हैं। यह कदम लंबे समय से चली आ रही डुप्लीकेसी की समस्या को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
पुनरीक्षण अभियान की एक अहम उपलब्धि यह भी रही कि 1 करोड़ 5 लाख नए मतदाता ऐसे हैं, जो पहली बार मतदाता बने हैं। इनमें बड़ी संख्या में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा शामिल हैं। इससे पंचायत चुनावों में युवा मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि जारी की गई मतदाता सूची पर 30 दिसंबर तक दावा और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में गलत दर्ज है, छूट गया है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल है, तो संबंधित व्यक्ति तय समयसीमा में सुधार के लिए आवेदन कर सकता है।
दावा-आपत्तियों के निस्तारण के बाद 6 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद इसी अंतिम सूची के आधार पर पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि अंतिम सूची जारी होने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग की अपील
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपनी मतदाता प्रविष्टि अवश्य जांच लें, ताकि चुनाव के समय किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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