छह नोड्स में तेजी से बढ़ रहा विकास, 62 कंपनियों को जमीन आवंटित
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्थापित हो रहा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Defence Industrial Corridor) अब अपने पूरे स्वरूप में आकार लेता दिख रहा है। सरकार द्वारा संचालित इस महात्वाकांक्षी योजना (ambitious plan) से राज्य में रक्षा उत्पादन को नई गति मिल रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे भविष्य में 52 हजार से अधिक रोजगार के अवसर खुलने की उम्मीद है।
राज्य के छह नोड्स—अलीगढ़, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, लखनऊ और आगरा—में बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना यूपी को रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार अब तक 62 कंपनियों को कुल 977.54 हेक्टेयर से अधिक भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अलावा 2097 हेक्टेयर से अधिक भूमि को औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज गति से आगे बढ़ी है और विभिन्न नोड्स में 2,040 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। अलीगढ़ नोड इस अभियान में सबसे आगे है, जहां सबसे अधिक 24 कंपनियों को भूमि दी गई है, जबकि कानपुर में कंपनियों को सबसे अधिक 210 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है। दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से जारी है।
डिफेंस कॉरिडोर के पूरा होने पर प्रदेश में लघु और विशाल रक्षा उद्योगों को बढ़ावा,स्थानीय युवाओं के लिए बड़े रोजगार अवसर,और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल कर देगी।
सरकार का लक्ष्य है कि इस कॉरिडोर में अत्याधुनिक उपकरण, आर्मामेंट, एयरोस्पेस मशीनरी और मिलिट्री टेक्नोलॉजी का उत्पादन बड़े पैमाने पर हो सके।
योजना जिस गति से आगे बढ़ रही है, उससे यह स्पष्ट है कि यूपी का डिफेंस कॉरिडोर अब सपना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन रहा है।


