लखनऊ| चुनाव आयोग की मतदाता सुविधा ‘बुक अ कॉल विद बीएलओ’ के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने देशभर में चौथा स्थान हासिल किया है। इस सुविधा के तहत प्रदेश में अब तक 2.36 लाख मतदाताओं ने आवेदन दर्ज कराए, जिनमें से 2.10 लाख मामलों का 48 घंटे के भीतर सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है। यह आंकड़ा प्रदेश के निर्वाचन तंत्र की सक्रियता और जवाबदेही को दर्शाता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ‘बुक अ कॉल विद बीएलओ’ के माध्यम से कॉल दर्ज कराने वाले प्रत्येक मतदाता को हर हाल में 48 घंटे के भीतर जवाब दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी समस्या—जैसे नाम जोड़ना, संशोधन, पता परिवर्तन या अन्य जानकारी—को लेकर मतदाताओं को समय पर समाधान मिलना अनिवार्य है।
आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में केवल 0.62 प्रतिशत मामले, यानी महज 233 ऐसे आवेदन हैं, जिनमें 48 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी बीएलओ की ओर से जवाब नहीं दिया गया। यह राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहद बेहतर स्थिति है। देशभर का औसत देखें तो करीब 18.84 प्रतिशत मामलों में 48 घंटे के भीतर जवाब नहीं मिल पाता है, जबकि उत्तर प्रदेश इस मानक पर काफी आगे नजर आ रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि ‘बुक अ कॉल विद बीएलओ’ सुविधा का उद्देश्य मतदाताओं और बूथ लेवल अधिकारियों के बीच सीधा और सरल संवाद स्थापित करना है, ताकि मतदाता सूची से संबंधित समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इस व्यवस्था से खासतौर पर नए मतदाताओं, वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिली है।
देशभर में इस सुविधा के उपयोग की बात करें तो पहले स्थान पर लद्दाख है, जहां मात्र 31 लोगों ने इस सेवा का लाभ लिया। इसके बावजूद वहां शत-प्रतिशत निस्तारण के चलते वह शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लाखों आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण होना चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है। निर्वाचन विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में इस सुविधा के प्रति जागरूकता और बढ़ेगी, जिससे मतदाताओं की भागीदारी और भी मजबूत होगी।

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