लखनऊ| प्रदेश सरकार राज्य में चल रही और प्रस्तावित विकास योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 22 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश करने जा रही है। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था किए जाने की संभावना है, जिससे बुनियादी ढांचे, जनकल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न विभागीय परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम प्रदेश के समग्र विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग को विभिन्न विभागों की ओर से अनुपूरक बजट से जुड़े प्रस्ताव लगातार प्राप्त हो रहे हैं। इन प्रस्तावों में सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, नगर विकास, आवास, ऊर्जा और ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यों के लिए अतिरिक्त धन की मांग शामिल है। कई विभागों ने पहले से स्वीकृत परियोजनाओं के लिए बढ़ी हुई लागत और समयबद्ध क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता जताई है।

वित्त विभाग इन सभी प्रस्तावों की गहन जांच-पड़ताल कर रहा है ताकि केवल आवश्यक और प्राथमिकता वाले कार्यों को ही अनुपूरक बजट में शामिल किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इन प्रस्तावों को अंतिम रूप देंगे। बैठक में यह तय किया जाएगा कि किन योजनाओं और परियोजनाओं को तत्काल धनराशि दी जानी है और किन कार्यों को अगले वित्तीय वर्ष की मुख्य बजट प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

अनुपूरक बजट का मुख्य उद्देश्य उन विकास कार्यों को गति देना है, जो किसी कारणवश मुख्य बजट में पर्याप्त धन न मिलने के कारण प्रभावित हो रहे हैं या जिनकी लागत में वृद्धि हो गई है। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर पहुंचे।

राज्य सरकार का दावा है कि इस अतिरिक्त बजटीय प्रावधान से न सिर्फ विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। 22 दिसंबर को विधानसभा में पेश होने वाला यह अनुपूरक बजट आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश के विकास एजेंडे को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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