ऊंटगन नदी में डूबने से 3 युवकों की मौत, गांव में मातम पसरा

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आगरा। नवरात्र के शुभ अवसर पर गांव कुसियापुर में खुशियों का माहौल था, लेकिन गुरुवार दोपहर खेरागढ़ क्षेत्र में ऊंटगन नदी में डूबने की दर्दनाक घटना ने सब कुछ बदल कर रख दिया। देवी विसर्जन के दौरान 13 युवक तेज बहाव और गहराई वाले पानी में समा गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद एक युवक विष्णु को बचाया, लेकिन तीन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और देर रात एक अन्य किशोर मनोज का शव बरामद हुआ।
घटना की जानकारी पाकर गुस्साए ग्रामीण खेरागढ़ से बसई नवाब जाने वाले मार्ग पर जाम लगा दिया। उनका कहना था कि अगर समय पर रेस्क्यू अभियान पहुंचता, तो कई युवकों की जान बचाई जा सकती थी। इस हादसे ने पूरे गांव को शोक और मातम में डाल दिया। दहाड़े मारकर रोती माताएं, बेसुध पिता, और बिलखती बहनें नदी किनारे खड़ी रहीं, किसी का दिल भी सहम उठा। गांव के लोग और रिश्तेदार उन्हें सांत्वना देने की कोशिश करते रहे, लेकिन आँसुओं और दर्द को रोक पाना असंभव था।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुःखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए प्रभु श्री राम से दिवंगत आत्माओं को सद्गति और परिजनों को इस अथाह दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने घायलों के तत्काल अस्पताल में उपचार और उनके शीघ्र स्वस्थ होने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए।हादसे में जान गंवाने वाले युवकों के परिवारों की कथा अत्यंत मार्मिक है। 17 वर्षीय अभिषेक के माता-पिता और बहनें सदमे में हैं, 15 वर्षीय सचिन, 20 वर्षीय वीनेश, 22 वर्षीय भगवती, 16 वर्षीय ओकेश, 20 वर्षीय गजेंद्र, 15 वर्षीय दीपक, 14 वर्षीय मनोज और 21 वर्षीय करन – सभी के घरों में मातम पसरा है। माँ-बाप की आंखों से आँसू बह रहे हैं, बहनें बिलख रही हैं और परिवार के बुजुर्ग सदमे में हैं।रेस्क्यू में देरी और तेज बहाव के कारण इस हादसे की भयानकता और बढ़ गई। एसडीआरएफ और पुलिस ने घटनास्थल पर रात तक जुटकर शवों को बाहर निकाला और घायलों का इलाज सुनिश्चित किया। गांव में खुशी का माहौल एक क्षण में मातम में बदल गया। यह घटना न सिर्फ प्रभावित परिवारों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा सदमा छोड़ गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद और सहारा प्रदान किया जाए, ताकि इस दुःख की घड़ी में उन्हें थोड़ा सांत्वना मिल सके।

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