प्रयागराज। बहुचर्चित उमेश पाल हत्याकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद माफिया अतीक अहमद के बहनोई डॉ. अखलाक अहमद, वकील विजय मिश्रा, ड्राइवर कैश और नौकर नियाज की जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सभी आरोपियों की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की एकलपीठ ने सुनवाई की।
सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने दलील दी कि सभी आरोपी हत्याकांड की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। वहीं, उमेश पाल की पत्नी जया पाल के अधिवक्ता प्रवीण पांडेय ने भी अदालत से कहा कि ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, जबकि शाइस्ता परवीन, जैनब और गुड्डू मुस्लिम जैसे सात आरोपी अब भी फरार हैं। ऐसे में इनकी रिहाई से मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत से जमानत की गुहार लगाते हुए कहा कि आरोपियों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। डॉ. अखलाक अहमद, जो मेरठ निवासी हैं, ने कहा कि वे पेशे से डॉक्टर हैं और अपराध की दुनिया से कोई संबंध नहीं रखते। उन्हें केवल अतीक अहमद के रिश्तेदार होने के कारण फंसाया गया है। पुलिस का दावा है कि हत्याकांड के बाद फरार बमबाज गुड्डू मुस्लिम, जो पांच लाख का इनामी है, ने मेरठ में डॉ. अखलाक के घर में शरण ली थी।
वकील विजय मिश्र पर हत्याकांड में मुखबिरी करने का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी। बचाव पक्ष की अधिवक्ता मंजू सिंह ने कहा कि विजय मिश्रा केवल अतीक अहमद के वकील होने के कारण फंसाए गए हैं। इसी तरह कैश और नियाज की ओर से भी बेगुनाही की दलील दी गई। अधिवक्ताओं ने बताया कि कैश काफी पहले से ड्राइवर की नौकरी छोड़ चुका है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, जबकि नियाज न तो एफआईआर में नामजद है, न ही उसके पास से कोई बरामदगी हुई है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।






