फर्रुखाबाद । हजरत शेख मखदूम बुर्राक शाह लंगर जहां का 701वां उर्स मुबारक शानदार तरीके से शुरू होने के बाद दूसरे दिन भी जारी रहा। मेले में हजारों की तादाद में मुरीदों की भीड़ उमड़ पड़ी।
कमालगंज गंज के शेखपुर में लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले को छड़ियों वाले मेले के नाम से जाना जाता है। उर्स के मुबारक मौके पर छड़ी बाजों की सुरक्षा में शेख जी का डोला दरगाह पर पहुंचा। वाद नमाज जोहर महफिले मीलाद-ए- पाक का आयोजन किया गया। मीलाद-ए-पाक में नातिया कलाम पेश किये गये और सलातोसलाम के नजराने पेश किये गये। नमाजे असर से पहले चिल्लागाह पर जहां आज के ही दिन हजरत शेख मखदूम का विसाल (देहावसान) हुआ था। महफिले सिमा का आगाज हुआ और कुलशरीफ हुआ। दरगाह मखदूमिया के सज्जादानशीन हजरत अजीजुलहक गालिब मियां ने होश में आने के बाद मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली के लिए दुआये खैर की। कल शेखपुर और भोजपुर में परम्परागत मेला शेखपुर होगा।
परम्परा के अनुसारवही रिवायती ढप बजा कर लतीफ शेखपुरी ने को फारसी भाषा में लिखी रुबाई (श्लोक पढ़ी जिसके रूहानी (अध्यात्मिक) भेद को समझते ही सज्जादानशीन अजीजुल हक गालिब मियाँ पर (अचेतन) तारी हो गया था।
मेले में प्रसाद के रूप में लड्डुओं का वितरण किया जाता है शेखपुर के लड्डू काफी मशहूर हैं और दूर-दूर से लोग प्रसाद ग्रहण करने और दरगाह पर माता देखने के लिए प्रतिवर्ष मेले में आते हैं। यह मेल विगत लगभग सात सदियों से लगता चला आ रहा है जो अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्धहै।





