उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ सम्पन्न हुआ छठ महापर्व,पांचाल घाट पर आस्था और भक्ति का संगम

0
32

फर्रुखाबाद। लोक आस्था, श्रद्धा और पवित्रता के संगम का प्रतीक महापर्व छठ मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हर्षोल्लास और भक्तिभाव से संपन्न हुआ। शहर के पांचाल घाट पर हजारों श्रद्धालु परिवारों के साथ पहुंचे, जहां पूरे वातावरण में “छठ मैया की जय” और “ऊगा सूरज देवता” के भक्ति गीत गूंजते रहे।

पूर्वांचल विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित इस पर्व में सुहागिन और व्रतधारी महिलाओं ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर सूर्य देव और छठ मैया की आराधना की। मंगलवार सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं का सैलाब घाट की ओर उमड़ पड़ा। गंगा की लहरों में डूबते-उगते दीपों की झिलमिलाहट ने पूरे घाट को स्वर्णिम आभा से नहला दिया। महिलाएं पीले और लाल रंग के पारंपरिक वस्त्रों में सुसज्जित होकर पूजा में लीन नजर आईं।

घाट पर आध्यात्मिक दृश्य, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम

पांचाल घाट को इस वर्ष विशेष रूप से सजाया गया था — रंगीन झालरों, फूलों और रोशनी से पूरा घाट जगमगा रहा था। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। नगर निगम और पुलिस विभाग की टीमें लगातार निगरानी में जुटी रहीं। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष बैरिकेडिंग की गई थी ताकि भीड़ में कोई असुविधा न हो।पूर्वांचल विकास समिति पिछले 32 वर्षों से इस आयोजन को ससम्मान निभा रही है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ एक पूजा नहीं बल्कि “लोकसंस्कृति का जीवंत उत्सव” है, जो समाज को एकजुटता, स्वच्छता और अनुशासन का संदेश देता है।

सपा नेता डॉ. जितेंद्र सिंह यादव और अनीता रंजन भी पहुंचे घाट

छठ पूजा में इस वर्ष समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ. जितेंद्र सिंह यादव भी अपनी पत्नी और परिवार के साथ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उनकी ससुराल बिहार में है और छठ पर्व वहां की परंपरा में आत्मा की तरह रचा-बसा है। डॉ. यादव ने कहा, “छठ मैया का आशीर्वाद मिलना एक बड़ा सौभाग्य है, यह पर्व अनुशासन, त्याग और तपस्या का संदेश देता है।”

उनकी पत्नी, नवाबगंज ब्लॉक प्रमुख एवं सपा प्रदेश सचिव अनीता रंजन, सुबह 5 बजे के करीब घाट पर पहुंचीं और पूरी श्रद्धा के साथ अर्घ्य अर्पित किया। उन्होंने कहा कि छठ मैया सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, और यह बिहार का सबसे पवित्र एवं शुद्ध पर्व है। अनीता रंजन ने कहा, “छठ पर्व जैसा दूसरा कोई नहीं। इसकी शुद्धता, संयम और आत्मिक बल इसे विशेष बनाते हैं। सूर्य भगवान सबका कल्याण करें, यही हमारी प्रार्थना है।”

‘नहाय-खाय’ से लेकर ‘उगा सूर्य अर्घ्य’ तक चार दिवसीय आस्था का संगम

छठ पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, जब व्रती महिलाएं नदी या तालाब में स्नान कर शुद्ध भोजन करती हैं। दूसरे दिन ‘खरना’ होता है, जिसमें गुड़-चावल की खीर का प्रसाद बनाया जाता है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह व्रत संपन्न होता है। इन चार दिनों तक व्रती महिलाएं सात्विकता और आत्मसंयम का पालन करती हैं।

भक्ति, लोकगीत और समर्पण से गूंजा पूरा वातावरण

घाटों पर पारंपरिक छठ गीत — केलवा जे फरेला घवद से, ओ पिया के साथे… की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाएं सिर पर टोकरी रखे, उसमें फल, ठेकुआ, गन्ना, नारियल और सुपारी जैसे प्रसाद लेकर सूर्य देव को अर्पित करती रहीं।

अंत में, सूरज देव के उगते ही घाट पर जयघोष गूंज उठा और व्रतधारी महिलाओं ने प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरे पर संतोष और श्रद्धा की झलक दिखाई दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here