संवाददाता। यूथ इंडिया
नई दिल्ली/लखनऊ। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में बृजभूषण शरण सिंह,जो पूर्व डब्ल्यूएफआई प्रमुख और पूर्व भाजपा सांसद रह चुके हैं, ने इन नियमों का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने इसे समाज को बांटने वाला कानून करार देते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की है।
यह कानून समाज को जोडऩे की बजाय तोड़ रहा है बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि इस कानून को वापस लिया जाना चाहिए। यह समाज को जोडऩे का नहीं, बल्कि बांटने का काम कर रहा है।उन्होंने कहा कि समाज कागजी कानूनों से नहीं, बल्कि आपसी समझ और व्यवहार से चलता है।
गांवों में आज भी बिना भेदभाव के बच्चे खेलते हैंपूर्व सांसद ने शहरी सोच और जमीनी हकीकत के अंतर की ओर इशारा करते हुए कहा,गांव में आकर देखिए, वहां बच्चे आज भी बिना किसी भेदभाव के एक साथ खेलते हैं। समाज को बांटने वाली सोच ज़मीन पर काम नहीं करती।उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज से जुड़े फैसले दफ्तरों में बैठकर नहीं, बल्कि जमीन की सच्चाई देखकर लिए जाने चाहिए।
बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि ऐसे नियम, सामाजिक तनाव बढ़ाते हैं छात्रों में भ्रम पैदा करते हैं और शिक्षा के मूल उद्देश्य से भटकाते हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से अपील की कि ऐसे फैसलों पर फिर से विचार किया जाए। यूजीसी के नए नियमों को लेकर पहले ही शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के बीच बहस चल रही है। अब एक वरिष्ठ राजनीतिक चेहरे के विरोध के बाद यह मुद्दा और तेज राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।






