सामाजिक न्याय को संवैधानिक सुरक्षा देने की राष्ट्रपति से मांग

फर्रुखाबाद| कलेक्ट्रेट परिसर सोमवार को सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की बुलंद आवाज़ का गवाह बना, जब अधिवक्ताओं ने यूजीसी बिल 2026 के समर्थन में पैदल मार्च निकालते हुए केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा किया। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक तीखा और स्पष्ट ज्ञापन उप जिला अधिकारी गजराज सिंह को सौंपते हुए कहा कि अब सामाजिक प्रतिनिधित्व को केवल नीतिगत वादों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे संविधान संशोधन के जरिए स्थायी और बाध्यकारी बनाना होगा।
अधिवक्ताओं का कहना था कि यूजीसी से जुड़े वर्तमान विनियमों को सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्याओं पर निर्भर छोड़ने के बजाय संसद से विधिवत कानून बनाकर पारित कराया जाए। साथ ही, यूजीसी विनियमों पर लगे स्टे को हटाने के लिए तत्काल और प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित समता समिति में अनिवार्य रूप से एक एसटी, दो एससी और चार ओबीसी सदस्यों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए और यही सामाजिक संतुलन निगरानी समिति में भी बाध्यकारी हो।
ज्ञापन में न्यायपालिका पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा गया कि विशेषकर संविधान पीठों में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व का घोर अभाव लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर कर रहा है। सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में विमुखता अब एक परंपरा बनती जा रही है, जो चिंताजनक है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि संविधान पीठों में एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, सामान्य वर्ग और अंतरविवाह से उत्पन्न वर्ग के प्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि न्याय केवल दिखाई ही न दे बल्कि सामाजिक रूप से महसूस भी हो।
उन्होंने निर्वाचन आयोग को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जो संस्था लोकतंत्र की संरक्षक है, उसमें भी सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन अनिवार्य किया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि इन सभी व्यवस्थाओं को केवल नीतिगत निर्देश बनाकर छोड़ा गया तो भविष्य में कोई भी संस्था लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर कर सकती है। इसलिए इन सभी प्रावधानों को संविधान संशोधन के माध्यम से सुरक्षित किया जाना समय की मांग है।
इस मौके पर अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे इन गंभीर मुद्दों पर संज्ञान लेकर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं को आवश्यक निर्देश दें। पैदल मार्च और ज्ञापन सौंपने के दौरान सुभाष चंद्र शाक्य, सुनील कुमार कनौजिया, विपिन कुमार यादव, देवेंद्र सिंह यादव, आशुतोष कुमार, रक्षपाल सिंह, प्रदीप कुमार यादव, आशुतोष कटियार, सौरभ कटियार, केके यादव, बृजेश कुशवाह, शाहिद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद

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