जातिविहीन समाज की ओर बढऩे की जरूरत : सीजेआई
समाचार। यूथ इंडिया
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश देते हुए रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक वर्ष 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। यह रोक यूजीसी के नए नियमों को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान लगाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि 23 जनवरी, 2026 को अधिसूचित यूजीसी रेगुलेशन, 2026 मनमाने हैं और सामान्य वर्गों के साथ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। याचिकाओं में यह भी कहा गया कि ये नियम संविधान के प्रावधानों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन करते हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि देश को जातिविहीन समाज की ओर बढऩा चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं। सीजेआई ने यह भी कहा कि जिन्हें संरक्षण की वास्तविक आवश्यकता है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन संतुलन जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जा सकती है।
यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाएं मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नए नियम उच्च शिक्षा में समानता के नाम पर सामान्य वर्गों के खिलाफ असमानता पैदा करते हैं और इसी आधार पर इन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद यूजीसी के नए नियमों का क्रियान्वयन रुक गया है और देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में पहले से लागू 2012 के नियमों के तहत ही व्यवस्था संचालित की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई में अदालत इस पर विस्तृत विचार करेगी।





