अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का ऐलान— 19 मार्च से पहले सरकार वापस ले फैसला, वरना देशव्यापी आंदोलन
मुंबई। यूजीसी से जुड़े हालिया नियमों के विरोध में देशभर के सवर्ण संगठनों में असंतोष तेज हो गया है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सरकार से यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि 19 मार्च से पहले फैसला वापस नहीं हुआ, तो देशभर में “सवर्ण संग्राम यात्रा” निकाली जाएगी।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने कहा कि यह केवल किसी एक वर्ग या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान और समानता का सवाल है। उन्होंने कहा कि “आजादी से लेकर अब तक सवर्ण समाज को जातिवादी कहकर बदनाम किया गया। महापुरुषों, देवी-देवताओं और धर्मग्रंथों पर टिप्पणियां कर समाज को बांटने का प्रयास किया गया, ताकि वोट बैंक की राजनीति की जा सके।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की कुर्सी पाने के लिए जाति और धर्म को हथियार बनाया जा रहा है, जबकि असली मुद्दे—शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और बेरोजगारी—हाशिए पर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि जातिवाद से भी ज्यादा खतरनाक अवसरवादी राजनीति है, जो समाज को आपस में लड़ाकर सत्ता साधती है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी आंदोलन की तैयारी
महासभा के नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया द्वारा यूजीसी के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाए जाने से समाज की “इज्जत बची” है, लेकिन अब असल संघर्ष शुरू हो गया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से पहले ही सरकार स्वयं नियमों को वापस ले।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने स्पष्ट किया कि आंदोलन आधी-अधूरी तैयारी के साथ नहीं होगा। सभी सवर्ण संगठनों से आपसी श्रेय लेने या श्रेष्ठ बनने की होड़ छोड़कर एकजुट होकर महापंचायत करने की अपील की गई है।नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मांग नहीं मानी, तो
“खाड़ी से पहाड़ी तक सवर्ण संग्राम यात्रा की गूंज सुनाई देगी।”
महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू की समीक्षा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि मौजूदा राजनीति में—
विकास के मुद्दों (शिक्षा, स्वास्थ्य) की जगह धर्म और जाति की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है,महंगाई और बेरोजगारी जैसी विफलताओं को छिपाने के लिए आंकड़े और सूचनाएं दबाई जा रही हैं,और विपक्ष व आलोचकों को डराने के लिए सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं।
सवर्ण संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान और समान अधिकार के लिए है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और 19 मार्च से पहले होने वाले फैसले पर टिकी है।






