फर्रुखाबाद। यूजीसी बिल को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सामाजिक संस्था अमर ज्योति सेवा संस्थान ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संस्था का आरोप है कि यह बिल भारतीय संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन करता है और सामाजिक समरसता को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी बिल के प्रावधान संविधान के उस मूल सिद्धांत के विपरीत हैं, जिसमें कहा गया है कि कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं। संस्था का कहना है कि बिल में समानता के सिद्धांत को नजरअंदाज कर संविधान के आंतरिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास किया गया है।
संस्था ने आशंका जताई कि यूजीसी बिल जातिगत वैमनस्य को बढ़ावा देगा और समाज में नए विभाजन की रेखाएं खींचेगा। यह केवल किसी एक वर्ग या जाति के लिए नुकसानदेह नहीं है, बल्कि सभी वर्गों और समुदायों को प्रभावित करेगा, जिससे राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आम जनमानस में आक्रोश
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यूजीसी बिल को लेकर आम जनता में अत्यंत आक्रोश है। संस्था का कहना है कि इस जनभावना को प्रधानमंत्री से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। ऐसे में लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए इस बिल को वापस लेना आवश्यक है।
देशहित में बिल वापसी की मांग
अमर ज्योति सेवा संस्थान ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे संविधान के सजग प्रहरी के रूप में अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए यूजीसी बिल को तत्काल वापस लें, ताकि संविधान प्रदत्त मूल्यों, अधिकारों और देश की एकता-अखंडता की रक्षा हो सके।
इन लोगों ने किए हस्ताक्षर
ज्ञापन पर मनीष सिंह एडवोकेट, प्रमोद तिवारी एडवोकेट, राम जी बाजपेई एडवोकेट सहित संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।फिलहाल प्रशासन या केंद्र सरकार की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यूजीसी बिल को लेकर विरोध के स्वर लगातार तेज होते नजर आ रहे हैं।

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