उच्च न्यायालय से पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ आरती सिंह को हिरासत में लेने का कोई आदेश नहीं

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– बुधवार दोपहर 12 बजे होगी अगली सुनवाई
– अभियुक्त नॉन प्रैक्टिशनर वकील अवधेश मिश्रा ने अपने गुर्गो से सोशल मीडिया पर फ़ैलवाई थी अफवाह
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच — न्यायमूर्ति जे.जे. मुनिर एवं न्यायमूर्ति संजीव कुमार — में मंगलवार को सुनी गई हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 854/2025 ( प्रीति यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में पारित आदेश से स्पष्ट है कि फतेहगढ़ की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह को हिरासत में लेने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। वह याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के हलफनामे का जवाब देने के लिए अगले दिन न्यायालय में उपस्थित रहेगी।
अदालत ने यह भी कहा है कि आरती सिंह , 15 अक्टूबर को अपना शपथपत्र (affidavit) प्रस्तुत करेंगी। साथ ही, याचिकाकर्ता प्रीति यादव को भी अपने पक्ष में जवाब दाखिल करने का अवसर प्रदान किया गया है।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया है कि इस पर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की ओर से बुधवार को जवाब दाखिल किया जाए।
अदालत के समक्ष यह भी उल्लेख किया गया कि याचिका से जुड़े व्यक्ति अनमोल यादव को एक अन्य मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, इसलिए वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सके।
वहीं, यह भी स्पष्ट हुआ कि अपराधी व स्वयंभू वकील अवधेश मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ से किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। बावजूद इसके, उनके समर्थकों और तथाकथित गुर्गो द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करते हुए यह झूठ फैलाया गया कि अदालत ने पुलिस अधीक्षक को हिरासत में लेने का आदेश दिया है।
न्यायालय सूत्रों ने बताया कि ऐसा कोई आदेश न तो पारित हुआ है और न ही विचाराधीन है। अदालत के आदेश को लेकर इस तरह का फर्जी और गुमराह करने वाला प्रचार न्यायालय की गरिमा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल अमित सक्सेना एवं ए.जी.ए. एस.एस. तिवारी उपस्थित रहे, जिन्होंने जवाबी हलफनामा दाखिल करने हेतु समय मांगा। अदालत ने निर्देश दिया कि मामला बुधबार दोपहर 12 बजे पुनः सूचीबद्ध किया जाए।
इस बीच, अदालत में दर्ज बयान के अनुसार, प्रीति यादव ने बताया कि उनके पति को पुलिस ने पकड़ लिया था और उनसे जबरन दस्तखत कराए गए। उन्होंने यह भी कहा कि वे पढ़ी-लिखी नहीं हैं और नहीं जानतीं कि किन कागज़ों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया।
अदालत में बयान और कार्यवाही की पूरी प्रक्रिया पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, सीओ कायमगंज राजेश कुमार द्विवेदी एवं एसएचओ अनुराग मिश्रा की उपस्थिति में हुई।

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