अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत के बीच रिटायर्ड अमेरिकी सेना के कर्नल और डिफेंस एक्सपर्ट डगलस मैकग्रेगर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत कभी भी अमेरिका की हर नीति और फैसले से सहमत नहीं होगा, क्योंकि कोई भी देश अपने राष्ट्रीय हितों से ऊपर नहीं जा सकता। मैकग्रेगर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी पैदा कर दी है।
न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में डगलस मैकग्रेगर ने अमेरिकी नीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सोच अक्सर ‘या तो हमारे साथ रहो या हमारे खिलाफ’ जैसी रही है, जो व्यावहारिक नहीं है। मैकग्रेगर के मुताबिक, इस तरह की नीति न तो साझेदारी को मजबूत करती है और न ही लंबे समय तक किसी देश के साथ भरोसेमंद रिश्ते बना पाती है।
उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पिछले 25-30 वर्षों में उनकी सोच से काफी दूर चला गया है। वॉशिंगटन का मानना था कि देशों को अपने हितों के आधार पर रिश्ते बनाने चाहिए, न कि दबाव या धमकी के जरिए। मैकग्रेगर ने कहा कि आज की अमेरिकी नीति इस मूल विचार को नजरअंदाज कर रही है।
रूस के साथ भारत के तेल व्यापार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया पर भी मैकग्रेगर ने कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रूस से व्यापार करने पर किसी देश को दंडित करना एक “बेवकूफी वाली सोच” है। उनका मानना है कि ट्रेड और कॉमर्स के फैसले आपसी लाभ के आधार पर होने चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के तहत।
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने के जवाब में भारत से आने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था को और जटिल बना सकते हैं।
मैकग्रेगर ने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ साझेदारी को ‘लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप’ की तरह देखना चाहिए, जहां दोनों देश अपने-अपने हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग करें। उन्होंने साफ कहा कि यह मान लेना गलत है कि भारत हर मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़ा होगा।
भारत-अमेरिका सुरक्षा संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेड, कॉमर्स और सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की मजबूत वजहें हैं। ऐसे में अमेरिका को चाहिए कि वह मतभेदों के बजाय साझा हितों पर ध्यान दे और रिश्तों को आगे बढ़ाए।
रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए मैकग्रेगर ने कहा कि भारत लंबे समय से रूस का सहयोगी रहा है, भले ही वह गुटनिरपेक्ष नीति अपनाता आया हो। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने अक्सर रूस का समर्थन किया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत-चीन संबंधों पर बोलते हुए डिफेंस एक्सपर्ट ने कहा कि किसी को भी यह उम्मीद नहीं है कि भारत और चीन के बीच युद्ध होगा। उन्होंने सीमा पर होने वाली झड़पों को गंभीर युद्ध से अलग बताते हुए कहा कि यह विवाद सीमाओं की व्याख्या को लेकर है, न कि पूर्ण युद्ध की तैयारी का संकेत।
कुल मिलाकर डगलस मैकग्रेगर का बयान अमेरिका की मौजूदा विदेश और व्यापार नीति पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनका मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में भारत जैसे देशों के साथ मजबूत रिश्ते चाहता है, तो उसे दबाव की राजनीति छोड़कर बराबरी और सम्मान पर आधारित साझेदारी की ओर बढ़ना होगा।


