वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के बीच नाटो को लेकर बड़ा और तीखा बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका को इस युद्ध में नाटो देशों की मदद की कोई आवश्यकता नहीं है और वह अकेले ही अपने अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में सक्षम है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नाटो के कई सहयोगी देशों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह स्थिति उनके लिए नई नहीं है, क्योंकि लंबे समय से नाटो एकतरफा व्यवस्था की तरह काम कर रहा है, जिसमें अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन बदले में उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च कर नाटो देशों की रक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन जब अमेरिका को उनकी जरूरत होती है तो वही देश पीछे हट जाते हैं। उन्होंने नाटो को “वन-वे स्ट्रीट” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन संतुलित सहयोग की भावना पर खरा नहीं उतर रहा है।
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार ईरान की नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर क्षति हुई है, जबकि कई सैन्य ठिकानों और रडार सिस्टम को भी नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी अब सक्रिय स्थिति में नहीं हैं।
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है और वह बिना किसी सहयोग के भी अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि नाटो के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की मदद के बिना भी अमेरिका अपने अभियान को जारी रखने में पूरी तरह सक्षम है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाटो को लेकर इस तरह की टिप्पणी से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है, वहीं क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।


