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Saturday, April 4, 2026

ट्रम्प ने ईरान को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

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वॉशिंगटन
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाया तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात और गंभीर हो गए हैं।

ईरान ने इस चेतावनी पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल उसके महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि बुशहर न्यूक्लियर साइट पर कई बार हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है।

इस बीच, ईरान और इजराइल के बीच हमले लगातार जारी हैं। ईरान ने उत्तरी इजराइल के कई शहरों पर मिसाइल दागे, जबकि जवाब में इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया। इन हमलों से दोनों देशों में भारी नुकसान और दहशत का माहौल है।

संघर्ष का दायरा अब लेबनान तक फैल चुका है। लेबनान से इजराइल के क्षेत्रों पर रॉकेट दागे गए, जिसके बाद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में एयर स्ट्राइक की। इस कार्रवाई में कई लोगों की मौत और बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है।

रूस ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। रूस का कहना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

वहीं, खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। कुवैत ने बताया कि उसके एयरस्पेस में कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दाखिल हुए, हालांकि उन्हें समय रहते ट्रैक कर लिया गया। इससे यह साफ है कि युद्ध का प्रभाव अब कई देशों तक फैल रहा है।

इस पूरे संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के तेल और गैस सप्लाई का अहम मार्ग है, वहां तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। कई देशों ने अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि इनके फैसले ही इस संकट की दिशा तय करेंगे।

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