वाशिंगटन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेबाक और अलग अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। मियामी में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल समिट के दौरान उन्होंने ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
यह मौका ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव’ (FII) समिट का था, जो मियामी के प्रतिष्ठित फाएना होटल में आयोजित किया गया। इस मंच पर ट्रंप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश जैसे गंभीर मुद्दों पर बात की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उन्होंने अपने भाषण की दिशा अलग ही मोड़ दी।
मंच पर आते ही ट्रंप ने खुद को “अनफिल्टर्ड” बताते हुए कहा कि उनसे किसी भी विषय पर सवाल पूछे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे उन नेताओं में से नहीं हैं जो पहले से सवाल तय करवाते हैं या मुश्किल सवालों से बचते हैं।
ट्रंप ने कहा, “आप मुझसे जो चाहें पूछ सकते हैं, निजी या सार्वजनिक—मैं कुछ नहीं छिपाता।” उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया और तुरंत सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का विषय बन गया।
उन्होंने पारंपरिक नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ज्यादातर राजनेता सवालों से डरते हैं और पहले से छंटनी कराते हैं, लेकिन वे खुद को एक खुली किताब मानते हैं। इस तरह के बयान से उन्होंने खुद को आम नेताओं से अलग दिखाने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की सोची-समझी रणनीति हो सकती है। इसके जरिए वे खुद को एक ‘ईमानदार’ और ‘सीधे’ नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं, जो बिना किसी दिखावे के अपनी बात रखते हैं।
हालांकि, अपने इस अनौपचारिक अंदाज के बाद ट्रंप ने अचानक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी शुरू कर दी। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति और खासकर ईरान को लेकर बड़ा दावा किया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है और उसकी ताकत को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की सैन्य रणनीति बेहद प्रभावी रही है।
हालांकि, ईरान की ओर से इन दावों को खारिज किया गया है। वहां के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनके पास अब भी पर्याप्त मिसाइल क्षमता और संसाधन मौजूद हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग ट्रंप के इस खुले अंदाज की सराहना कर रहे हैं, तो वहीं आलोचकों का मानना है कि एक बड़े नेता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
ट्रंप के भाषण के वीडियो को कई प्रभावशाली सोशल मीडिया यूजर्स ने शेयर किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। इसने समर्थकों और विरोधियों के बीच स्पष्ट विभाजन भी दिखा दिया।
समग्र रूप से देखा जाए तो मियामी का यह कार्यक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि डोनाल्ड ट्रंप पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग हैं। वे न तो तय स्क्रिप्ट पर चलते हैं और न ही प्रोटोकॉल की सीमाओं में बंधे नजर आते हैं।
ऐसे में उनका यह ‘अनफिल्टर्ड’ अंदाज जहां एक वर्ग को आकर्षित करता है, वहीं दूसरे वर्ग के लिए यह चिंता का विषय भी बना हुआ है।


