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Tuesday, February 10, 2026

पांचाल पुरुष स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, ‘चाचा जी’ को याद कर भावुक हुआ जनसमूह

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फर्रुखाबाद: पांचाल (Panchal) पुरुष, भाजपा के वरिष्ठ नेता और यूपी की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी (Late Brahmadutt Dwivedi) ‘चाचा जी’ की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पांचाल घाट स्थित उनकी प्रतिमा पर उनके छोटे पुत्र प्रियांक दत्त द्विवेदी, भतीजे सुयेश द्विवेदी तथा संजीव मिश्रा ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर संतों को आमंत्रित कर तिलक बंधन, वस्त्र भेंट, माला पहनाकर पुण्यदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें यूपी की राजनीति का एक निर्भीक, विचारनिष्ठ और सिद्धांतों पर अडिग नेता बताया। वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे, जिनका प्रभाव केवल सत्ता और पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिनके फैसलों ने राजनीतिक इतिहास की दिशा बदल दी।

वर्ष 1995 की वह ऐतिहासिक घटना आज भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जब लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित गेस्ट हाउस में तत्कालीन बसपा नेता मायावती की जान संकट में थी। सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद उग्र भीड़ ने गेस्ट हाउस को घेर लिया था। उस समय फर्रुखाबाद से भाजपा विधायक रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने अपनी जान की परवाह किए बिना ढाल बनकर मायावती की सुरक्षा की। उनकी सूझबूझ और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से संपर्क के बाद भाजपा ने मायावती को समर्थन देकर उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया।

सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद मायावती ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी के प्रति आजीवन सम्मान बनाए रखा। यहां तक कहा जाता है कि यदि बसपा-भाजपा गठबंधन सरकार बनती, तो वे आधे कार्यकाल के लिए केवल द्विवेदी को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को तैयार थीं। जनसंघ से शुरू हुआ राजनीतिक सफर ब्रह्मदत्त द्विवेदी आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। राजनीति में उन्होंने जनसंघ से शुरुआत की और 1971 में फर्रुखाबाद नगर पालिका परिषद के पार्षद बने। 1977 में पहली बार विधायक चुने गए और कई बार विधानसभा पहुंचकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। कल्याण सिंह सरकार (1991-92) में उन्होंने राजस्व और ऊर्जा मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

10 फरवरी 1997 को फर्रुखाबाद में एक तिलक समारोह से लौटते समय गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा द्वारा की गई उनकी हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। उनकी अंतिम यात्रा में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने उनके कद को स्वतः परिभाषित कर दिया।

उनके निधन पर मायावती का भावुक होना और सार्वजनिक रूप से आंसू बहाना भारतीय राजनीति के दुर्लभ क्षणों में गिना जाता है। आज भी ब्रह्मदत्त द्विवेदी को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने सिद्धांत, साहस और संवेदनशीलता को राजनीति का आधार बनाया। पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं, समर्थकों और स्थानीय लोगों की बड़ी उपस्थिति रही, जिन्होंने ‘चाचा जी’ को नमन कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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