किम्बरली: एक हीरे की खदान में भूस्खलन और पानी भरने से फंसे पांच मजदूरों को अब मृत मान लिया गया है। खदान संचालित करने वाली कंपनी ने कहा है कि सुरंग पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर चुकी है, जिससे अंदर तक पहुंचना संभव नहीं रहा।
यह हादसा 17 फरवरी को हुआ था, जब खदान के भीतर कार्यरत श्रमिक अचानक मलबे और तेज़ी से भरते पानी की चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूस्खलन के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए थे।
बचाव दल ने कई दिनों तक लगातार प्रयास किए, लेकिन सुरंग के भीतर कीचड़, पानी और ढही हुई चट्टानों के कारण आगे बढ़ना बेहद जोखिम भरा साबित हुआ। विशेषज्ञों ने भी अंदर प्रवेश को असुरक्षित बताया।
कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मजदूरों के जीवित बचने की संभावना नहीं बची है। इस दुखद निष्कर्ष के बाद खदान को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया गया।
साथ ही कंपनी ने स्वयं को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले से लगभग 1,200 कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं, जिससे स्थानीय परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
किम्बरली ऐतिहासिक रूप से हीरा खनन का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां की खदानों ने देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
खनन क्षेत्र पहले भी सुरक्षा मानकों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली की प्रभावशीलता पर फिर बहस तेज हो गई है।
श्रमिक संगठनों ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि खनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियमों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने भी घटना की समीक्षा शुरू कर दी है। हादसे से प्रभावित परिवारों में शोक का माहौल है और पूरे क्षेत्र में दुख व चिंता की लहर है।
यह दुर्घटना दक्षिण अफ्रीका के खनन उद्योग के सामने खड़े जोखिमों को एक बार फिर उजागर करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर देती है।


