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Monday, March 16, 2026

1 अप्रैल से देश के टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस, फास्टैग या यूपीआई से ही होगा भुगतान

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औरैया। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए जल्द ही बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। एनएचएआई ने देशभर के टोल प्लाजा को पूरी तरह कैशलेस बनाने का फैसला किया है। प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से नेशनल एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित लगभग 1150 टोल प्लाजा पर नकद भुगतान की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल टैक्स का भुगतान केवल फास्टैग या यूपीआई के माध्यम से ही करना होगा। इसके लिए वाहन चालकों को अपना फास्टैग सक्रिय रखना जरूरी होगा। जिन वाहनों में फास्टैग सक्रिय नहीं होगा, उन्हें टोल बूथ पर बारकोड स्कैन कर यूपीआई के जरिए भुगतान करना पड़ेगा।
एनएचएआई के इस निर्णय के बाद वाहन चालकों के लिए एंड्रॉयड मोबाइल फोन रखना भी लगभग अनिवार्य हो जाएगा, क्योंकि यूपीआई भुगतान के लिए स्मार्टफोन की आवश्यकता होगी। यदि किसी चालक के पास सक्रिय फास्टैग या यूपीआई की सुविधा नहीं होगी, तो वह टोल प्लाजा से आसानी से पार नहीं हो सकेगा।
एनएचएआई ने गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए जारी वार्षिक पास की दरों में भी बदलाव किया है। अभी तक तीन हजार रुपये में एक वर्ष या 200 बार टोल प्लाजा पार करने की सुविधा दी जाती थी। अब इस वार्षिक पास की कीमत में 75 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। यानी 1 अप्रैल से नए वार्षिक पास के लिए वाहन स्वामियों को 3000 रुपये के बजाय 3075 रुपये चुकाने होंगे। हालांकि जिन लोगों का वार्षिक पास पहले से सक्रिय है, उन्हें फिलहाल अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। नई दरें केवल अप्रैल के बाद रिचार्ज कराने वाले गैर-व्यावसायिक वाहनों पर लागू होंगी।
कानपुर–इटावा हाईवे पर स्थित अनंतराम टोल प्लाजा के संयुक्त महाप्रबंधक सत्यवीर यादव ने बताया कि प्राधिकरण से प्राप्त निर्देशों के अनुसार 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब केवल फास्टैग या यूपीआई के माध्यम से ही टोल टैक्स का भुगतान संभव होगा।
एनएचएआई का मानना है कि इस नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम में कमी आएगी, भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के वाहन चालकों के लिए यह बदलाव कुछ चुनौतियां भी पैदा कर सकता है, क्योंकि कई लोगों के पास अभी भी स्मार्टफोन या डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

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