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Friday, January 16, 2026

पाप कर्म से बचने के लिए ईश्वर को सर्वव्यापी मानना आवश्यक: आचार्य चंद्रदेव

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मेला रामनगरिया वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर , भजन कीर्तन की धूम

फर्रुखाबाद: आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेल श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी वर्ष के अंतर्गत प्रातःकाल यज्ञोपरान्त आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री (Acharya Chandradev) ने कहा कि पाप कर्म से बचने के लिए ईश्वर का सर्वत्र व्यापक मानना अत्यावश्यक है। व्यक्ति पाप कर्म इसलिए करता है क्यों कि वो ये मानता है कि हमें कोई देख नहीं रहा। मनुष्य जो भी कर्म करता है उस कर्म का फल परमात्मा अवश्य देता है। परमात्मा की न्याय व्यवस्था से कोई नहीं बच सकता।

ईश्वर कण-कण में व्यापक होके सभी के कर्मों का यथायोग्य फल देता है। श्रेष्ठ कर्मों का फल सुख और बुरे कर्मों का फल दुख के रूप में प्रत्येक मनुष्य को भोगना ही पड़ता है। धर्मानुकूल आचरण के द्वारा मनुष्य दुखों से बच सकता है। आचार्या दिव्या रामायणी जी ने भजन के माध्यम से बताया “कण कण में बसा प्रभु देख रहा, चाहे पुण्य करो चाहे पाप करो” जहाँ मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है वहीं फल भोगने में परतंत्र है। फल सुख के रूप में प्राप्त हो इसलिए मनुष्य को वेदानुकूल कर्म करने चाहिए।

पण्डित शिवनारायण शास्त्री ने रामकथा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया। पंडित रामवीर आर्य ने वेदोपदेश के द्वारा वेद के बताए हुए रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। स्वामी महेन्द्रानंद ने मंच का संचालन किया। सभा में उत्कर्ष आर्य, मंगलम आर्य, डॉक्टर सत्यम आर्य, उदयराज आर्य, संदीप आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य, उपासना कटियार, उदिता आर्या, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।।

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