दिसपुर: असम सरकार ने भूमि लेनदेन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लागू की गई नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति अगर अलग धर्म के व्यक्ति को जमीन बेचना चाहता है, तो उसे विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी, कोई हिंदू अगर मुस्लिम को, या मुस्लिम हिंदू को अथवा कोई अन्य धर्म (जैसे ईसाई, बौद्ध, सिख या जैन) के व्यक्ति को जमीन बेचता है, तो यह लेनदेन ‘अंतर-धार्मिक’ (inter-religious) माना जाएगा और इसकी अनुमति तत्काल नहीं मिलेगी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि असम एक संवेदनशील राज्य है और वहां धार्मिक और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए ऐसे लेनदेन को सावधानीपूर्वक जांचने की जरूरत है। इसलिए यह SOP लागू की गई है।
सरमा के अनुसार, SOP का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे भूमि हस्तांतरण किसी भी सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव को जन्म न दें। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित आवेदन की जांच तहसील स्तर से शुरू होगी और उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद ही लेनदेन को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल अंतर-धार्मिक लेनदेन पर लागू होगा, न कि समान धर्म के भीतर होने वाली जमीन की बिक्री पर। SOP के माध्यम से यह देखा जाएगा कि लेनदेन स्वेच्छा से हुआ है या किसी दबाव, प्रलोभन या योजना का हिस्सा है।
इस निर्णय को असम में सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, हालांकि कुछ वर्ग इसे विवादास्पद भी बता सकते हैं। सरकार का दावा है कि यह निर्णय जनहित में और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के मकसद से लिया गया है।