शाहजहांपुर: ब्लॉक भावलखेड़ा (Block Bhawalkheda) नगर विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना (Suresh Kumar Khanna) की विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह वही क्षेत्र है, जहां विधायक विकास को लेकर हमेशा अग्रसर और सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। बावजूद इसके, ब्लॉक भावलखेड़ा की कई ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर हो रहे कथित घोटाले प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ ग्राम प्रधान विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन की निकासी तो पूरी कर लेते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य न के बराबर दिखाई देते हैं। आरोप है कि सरकारी धन से अपनी जेबें गर्म करने के बाद वही प्रधान लखनऊ जाकर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से भेंट कर फोटो खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर “मंत्री जी/चाचा जी/ताऊ जी से आशीर्वाद प्राप्त हुआ” जैसे संदेश प्रसारित कर स्वयं को संरक्षण प्राप्त दिखाने का प्रयास करते हैं।
हालांकि बताया जाता है कि जब ऐसे मामलों की वास्तविकता मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के संज्ञान में आती है, तो वे किसी भी प्रकार की रियायत नहीं देते और गलत कार्य करने वालों को सख्त फटकार भी लगाते हैं। यही कारण है कि ऐसे अवसरों पर संबंधित प्रधानों की ओर से कोई फोटो या पोस्ट सार्वजनिक नहीं की जाती। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंत्री खन्ना कभी गलत व्यक्ति या गलत कार्य का समर्थन नहीं करते।
इसी क्रम में सरकार द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान के तहत ब्लॉक भावलखेड़ा की प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ई-रिक्शा ठेली, स्मार्ट डस्टबिन, झाड़ू-पोंछा, तशला-फावड़ा, सुरक्षा किट (दस्ताने, मास्क), मच्छर मारने की मशीनें, गीले-सूखे कूड़े के लिए बाल्टियां, स्टील कूड़ेदान तथा कूड़ा संग्रहण के लिए आरसीसी सेंटर निर्माण हेतु धन उपलब्ध कराया गया था।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कुछ गिने-चुने गांवों को छोड़ दें तो अधिकांश ग्राम पंचायतों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आरोप है कि आधे-अधूरे संसाधन दिखाकर शेष धन हजम कर लिया गया, और जो उपकरण खरीदे भी गए, वे या तो अनुपयोगी पड़े हैं या कभी इस्तेमाल ही नहीं हुए।
ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में महीनों से सफाई कर्मी तक नहीं पहुंचा, ऐसे में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त होने की बात बेमानी है। वहीं सामूहिक शौचालयों की स्थिति इतनी दयनीय बताई जा रही है कि यदि किसी मंत्री या जिले के आला अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंच जाएं तो उपयोग तो दूर, अंदर प्रवेश करते ही हालत खराब हो जाए।
आरोप यह भी है कि जब कभी-कभार कोई अधिकारी जांच के लिए पहुंचता है, तो कुछ प्रधान वित्त मंत्री और नगर विधायक का नाम बताकर उसे “ब्रह्मास्त्र” की तरह पेश कर देते हैं, जिससे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह को ब्लॉक भावलखेड़ा की ग्राम पंचायतों में व्यापक जांच और औचक निरीक्षण कराना चाहिए। तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा, और उन घोटालेबाजों के चेहरे बेनकाब होंगे जो एक ईमानदार नेता की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं।


