लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि धर्म को राजनीति से जोड़ना देश और समाज दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मायावती ने अपने पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ राजनीति का उद्देश्य सभी वर्गों के कल्याण, सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना को मजबूत करना होना चाहिए, न कि धर्म के नाम पर लोगों को बाँटना। उन्होंने चेतावनी दी कि जब धर्म को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे समाज में तनाव, विभाजन और अस्थिरता बढ़ती है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि “धर्म का राजनीतिकरण न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी कमजोर करता है।” उन्होंने यह भी इशारा किया कि सत्ता की राजनीति में बार-बार धार्मिक भावनाओं को उभारना असल मुद्दों—रोजगार, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा—से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। मायावती ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संविधान और कानून के दायरे में रहकर राजनीति करें और धर्म को व्यक्तिगत आस्था तक सीमित रखें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान मौजूदा राजनीतिक माहौल और बढ़ते धार्मिक विमर्श के संदर्भ में बेहद अहम है। यह बयान बसपा की उस पुरानी लाइन को दोहराता है, जिसमें पार्टी ने हमेशा सामाजिक न्याय, दलित-पिछड़ा हित और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता दी है।मायावती के इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। समर्थकों ने इसे लोकतंत्र के पक्ष में मजबूत आवाज बताया है, वहीं विरोधी दलों की ओर से पलटवार की संभावना भी जताई जा रही है।


