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Monday, February 2, 2026

योगी सरकार ने सभी 18 मण्डल मुख्यालयों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र खोलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोक भवन, लखनऊ में आयोजित महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा निर्णय लिया गया। प्रदेश सरकार (Yogi government) ने उत्तर प्रदेश के सभी 18 मण्डल मुख्यालयों पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र (District Disability Rehabilitation Centres – DDRCs) स्थापित करने और इनके संचालन का व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

वर्तमान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा राज्य के केवल 37 जनपदों में DDRCs संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें से सिर्फ 11 केन्द्र ही मण्डल मुख्यालयों पर मौजूद हैं। इस कारण प्रदेश स्तर पर दिव्यांगजनों को समग्र सेवाएँ प्राप्त करने में कई तरह की बाधाएँ सामने आती थीं। अब राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद 18 मण्डल मुख्यालयों पर स्थापित होने वाले नए पुनर्वास केन्द्र दिव्यांगजनों के लिए एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिव्यांगजनों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने 13 अक्टूबर 2025 को विभागीय कार्ययोजना के प्रस्तुतीकरण के दौरान सभी मण्डल मुख्यालयों पर पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना को तत्काल प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। विभाग द्वारा की गई कार्यवाही के बाद कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है।

राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि नई व्यवस्था से दिव्यांगजनों के लिए सेवा-प्रदान और भी पारदर्शी, सुगम, समयबद्ध और प्रभावी बनेगा। प्रदेश की बड़ी आबादी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजन अब दूर जाने की आवश्यकता के बिना अपने मण्डल मुख्यालय पर ही उपचार और पुनर्वास से जुड़ी सभी सुविधाएँ प्राप्त कर सकेंगे।

नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों में दिव्यांगजन सर्वेक्षण व चिह्नांकन, दिव्यांग शिविरों का आयोजन, सहायक उपकरणों की मरम्मत, कृत्रिम अंगों का निर्माण और फिटमेंट, चाल व उपयोग प्रशिक्षण, उपकरण वितरण जैसी सेवाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, दिव्यांगता की रोकथाम, प्रारम्भिक पहचान और सक्रिय हस्तक्षेप से संबंधित कार्यक्रम भी इन केन्द्रों के माध्यम से संचालित किए जाएँगे।

इन केन्द्रों पर दिव्यांग प्रमाण-पत्र, यूडीआईडी कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से संपन्न की जाएगी, जिससे लोगों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इसके अतिरिक्त, परामर्श, फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसी नैदानिक सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी, जो दिव्यांगजन एवं उनके परिवारों के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होंगी।

राज्य सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के दिव्यांगजनों को न केवल बेहतर सुविधाएँ प्राप्त होंगी, बल्कि उनका सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। यह कदम दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार की एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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