– अमेरिका-इस्राइल और ईरान आमने-सामने
वॉशिंगटन।
पश्चिम एशिया में जारी वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट अब खतरनाक और विस्फोटक दौर में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष 34वें दिन में पहुंच गया है, जहां हर गुजरते घंटे के साथ हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
मिसाइल हमलों, रॉकेट दागे जाने और लगातार सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र को युद्धभूमि में बदल दिया है। कई शहरों में सायरन बज रहे हैं और आम नागरिकों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है।
ताजा घटनाक्रम में इस्राइली रक्षा बलों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक अहम सैन्य ठिकाने और मोबाइल कमांड पोस्ट को नष्ट करने का दावा किया है। बताया जा रहा है कि तबरीज क्षेत्र में स्थित मिसाइल भंडारण स्थल को भी निशाना बनाया गया।
इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने फार्स प्रांत के ऊपर एक इस्राइली हर्मीस-900 ड्रोन को मार गिराया। इससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार तेज हो रहा है।
उधर, लेबनान से उत्तरी इस्राइल के गैलील क्षेत्र पर 30 से अधिक रॉकेट दागे गए, जिससे कई इलाकों में धुएं के गुबार उठते देखे गए। माना जा रहा है कि यह हमला ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह की ओर से किया गया है।
इस हमले के बाद उत्तरी इस्राइल में सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई। कई इलाकों में दहशत का माहौल बन गया है और नागरिकों को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस संघर्ष पर चिंता जताई है। यूएन प्रवक्ता के अनुसार, इंडोनेशियाई शांति सैनिकों की हत्या की जांच में समय लग सकता है, क्योंकि मौजूदा हालात में घटनास्थल तक पहुंचना और साक्ष्य जुटाना बेहद मुश्किल हो गया है।
इस बीच अमेरिका के अंदर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। डेमोक्रेटिक सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया भाषण की तीखी आलोचना की है और उनकी रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
सांसदों का कहना है कि ट्रंप के बयान न केवल भड़काऊ हैं, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है। उन्होंने ईरान को ‘पाषाण युग में भेजने’ जैसी टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया है।
वहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी इस युद्ध के असर दिखने लगे हैं। ट्रंप के संबोधन के कुछ ही समय बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका और गहरा गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। कई देश पहले ही इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी यह युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस संकट का कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा या दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है।


