लखीमपुर खीरी। मेरठ में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक ही गांव के तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले दो नाबालिगों समेत तीन मजदूरों के शव जैसे ही बथुआ ठंडा गांव पहुंचे, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। परिजनों का विलाप सुन हर कोई भावुक हो उठा।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बथुआ के निवासी अरशद, अलीमुद्दीन और ब्रजमोहन रोजी-रोटी की तलाश में मेरठ गए हुए थे। बुधवार देर रात हुए सड़क हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई और घरों में मातम छा गया।
हादसे की सूचना मिलने पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सहित अन्य जिम्मेदार लोग तत्काल मेरठ पहुंचे। वहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराते हुए शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद गुरुवार देर रात तीनों के पार्थिव शरीर गांव लाए गए, जहां परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।
शुक्रवार को पूरे गांव में गमगीन माहौल के बीच तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। अरशद और अलीमुद्दीन को मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जबकि ब्रजमोहन का अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
एक साथ तीन युवकों की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। हर घर में शोक का माहौल है और लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपने प्रियजनों को याद कर बिलख रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी करने गए इन युवकों की असमय मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठने लगी है, ताकि शोक संतप्त परिवारों को कुछ राहत मिल सके।


